
शिवपुरी/कुलदीप शर्मा की रिपोर्ट: कृषि उपज मंडी पिपरसमां में आयोजित राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव 2026 के दौरान मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम में शामिल महिला जनप्रतिनिधियों ने उन्हें मंच पर पीछे की पंक्ति में स्थान दिए जाने पर नाराजगी जताई। जनपद पंचायत अध्यक्ष हेमलता रघुवीर रावत और नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा मंच से नीचे उतर गईं, जबकि जिला पंचायत सदस्य भारती रावत कार्यक्रम छोड़कर चली गईं।
पीछे की पंक्ति में जगह मिलने से नाराजगी
बताया जा रहा है कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए मंच पर विधायक, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर पहुंचीं जनपद अध्यक्ष और नगर पालिका अध्यक्ष को पीछे की पंक्ति में स्थान दिया गया। इस व्यवस्था पर दोनों महिला जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई और मंच से नीचे उतर गईं। उनका कहना था कि वे जनता द्वारा चुनी गई प्रतिनिधि हैं और उन्हें भी मंच पर उचित सम्मान एवं स्थान मिलना चाहिए। महिला जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि यदि मंच पर महिला जनप्रतिनिधियों को ही पीछे बैठाया जाएगा तो यह व्यवस्था उचित कैसे मानी जा सकती है।
विधायक ने किया मान-मनौवल
मामला बढ़ता देख शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन स्वयं मंच से नीचे आए। उन्होंने दोनों महिला जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर उन्हें मनाने का प्रयास किया। बातचीत और मान-मनौवल के बाद जनपद अध्यक्ष हेमलता रघुवीर रावत और नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को वापस मंच पर लाया गया। इसके बाद दोनों को मंच की आगे की पंक्ति में स्थान दिया गया और कार्यक्रम आगे बढ़ा।
जिस वार्ड में कार्यक्रम, उसी की सदस्य को नहीं मिली जगह
विवाद का एक और पहलू जिला पंचायत सदस्य भारती रावत से जुड़ा रहा। बताया गया कि जिस जिला पंचायत वार्ड में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसी वार्ड की निर्वाचित सदस्य को मंच पर स्थान नहीं दिया गया। नाराजगी के चलते भारती रावत कार्यक्रम छोड़कर चली गईं। उनके ससुर भूपेंद्र रावत ने भी इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस क्षेत्र की जनता के प्रतिनिधि के वार्ड में इतना बड़ा राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, उस जनप्रतिनिधि को मंच पर स्थान मिलना सम्मान का विषय है।
प्रोटोकॉल के साथ जनप्रतिनिधियों के सम्मान पर भी सवाल
घटनाक्रम के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच प्रोटोकॉल और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर चर्चा होती रही। सवाल उठाया गया कि राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में निर्धारित प्रोटोकॉल के साथ-साथ जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के सम्मान और स्थानीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, मंच पर सीट आवंटन को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। पूरे मामले को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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