
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी की कीमतों की मार झेल रही जनता पर अब बिजली का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने जा रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली की दरों में ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) के रूप में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। कारपोरेशन की ओर से उपभोक्ताओं को जून माह का जो बिजली बिल भेजा जाएगा, उसमें दस प्रतिशत सरचार्ज जोड़कर भेजा जाएगा। पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक मार्च 2026 का ईंधन अधिभार जून के बिल के साथ उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। कारपोरेशन ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि कुल ईंधन अधिभार 20 प्रतिशत होना चाहिए, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि जुलाई के बिल में भी उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त भार डाला जाएगा।
उपभोक्ता परिषद ने जताई आपत्ति, मुख्यमंत्री से जांच की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली बिलों में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार की इस वसूली पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। परिषद का आरोप है कि बिजली कंपनियों ने पिछले दो साल के पुराने बकाए को एक साथ जोड़ते हुए यह भारी बढ़ोतरी की है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिषद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में वास्तविक विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित की गई थी, लेकिन कारपोरेशन ने मार्च 2026 में 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली की खरीद दिखाई है। इस बढ़े हुए अंतर के कारण प्रदेश के उपभोक्ताओं पर सीधे 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार डाल दिया गया है।
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