US सांसद का दावा- 30 साल में सबसे कमजोर हुए भारत-अमेरिका रिश्ते, ट्रम्प की टैरिफ नीति पर उठाए सवाल

भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर एक अमेरिकी सांसद के बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। सांसद ने दावा किया कि भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्ते पिछले 30 वर्षों में सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीति, व्यापारिक फैसलों और कई एकतरफा नीतिगत निर्णयों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को प्रभावित किया है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापारिक संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

अमेरिकी सांसद ने कहा कि भारत और अमेरिका लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हैं और रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत होता रहा है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में अपनाई गई कुछ व्यापारिक और आर्थिक नीतियों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की स्थिति बनी। उनका मानना है कि सहयोगी देशों के साथ संवाद और पारदर्शिता बनाए रखना किसी भी मजबूत साझेदारी की आधारशिला होती है।

सांसद ने विशेष रूप से ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने और कुछ मामलों में एकतरफा व्यापारिक फैसले लेने से मित्र देशों के साथ आर्थिक संबंधों पर असर पड़ा। उनका कहना है कि ऐसी नीतियों ने केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि आपसी विश्वास को भी प्रभावित किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध इतने व्यापक और मजबूत हैं कि संवाद के माध्यम से चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि समय-समय पर मतभेद सामने आने के बावजूद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी लगातार आगे बढ़ती रही है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सांसदों और नेताओं के व्यक्तिगत बयान सरकार की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसलिए ऐसे बयानों को संबंधित सरकारों की आधिकारिक स्थिति से अलग करके देखा जाना चाहिए। भारत और अमेरिका की सरकारें समय-समय पर विभिन्न मंचों पर अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराती रही हैं।

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gaurav singh rajput

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