
नई दिल्ली/कराकास: वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत सरकार के विशेष निमंत्रण पर 3 से 7 जून तक भारत की पांच दिवसीय रणनीतिक यात्रा पर आ रही हैं। यह महत्वपूर्ण दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब नई दिल्ली ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात में काफी रिकॉर्ड वृद्धि की है। कार्यवाहक राष्ट्रपति की इस पांच दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किए जाने की पूरी उम्मीद है, जिसे द्विपक्षीय और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
वैश्विक तेल और गैस शिपिंग के नवीनतम आंकड़ों का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि मई 2026 में वेनेजुएला का कुल तेल निर्यात लगभग 1.25 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया है, जो लगातार तीसरे महीने एक बड़ी वृद्धि को दर्शाता है। भारत वर्तमान में वेनेजुएला के सबसे बड़े और प्रमुख ग्राहकों में से एक बनकर उभरा है, जिसने पिछले महीनों की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करते हुए लगभग 427,000 बैरल प्रति दिन तेल का आयात किया है। वेनेजुएला से तेल आयात में यह उछाल एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत द्वारा अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की बढ़ती स्पष्ट रणनीति को प्रदर्शित करता है।
वर्तमान में 140 करोड़ से अधिक की विशाल आबादी और उच्च आर्थिक विकास दर वाले भारत की ऊर्जा खपत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह दोहराया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह व्यावसायिक दक्षता व राष्ट्रीय हित के आधार पर विभिन्न वैश्विक क्षेत्रों से तेल की आपूर्ति प्राप्त करने का प्रयास करती रहेगी। कई वर्षों तक वेनेजुएला भारतीय रिफाइनरियों, विशेष रूप से भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम रिफाइनरियों के लिए एक मुख्य आपूर्तिकर्ता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक समस्याओं के कारण इस व्यापार में लंबे समय तक गिरावट आई थी। अब वेनेजुएला के तेल उत्पादन और व्यापारिक परिस्थितियों में सुधार के साथ ही नई दिल्ली एक बार फिर कराकास को आपूर्ति के एक रणनीतिक और विश्वसनीय स्रोत के रूप में देख रही है।
वैश्विक भू-राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का यह भारत दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में आ रहे एक बड़े बदलाव को भी रेखांकित करता है। लंबे समय तक कुछ पारंपरिक तेल उत्पादक क्षेत्रों पर निर्भर रहने के बाद, भारत जैसी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अब भू-राजनीतिक जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए अपने आपूर्ति पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं। परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन के लिए ईंधन की निरंतर बढ़ती मांग के बीच भारत ऊर्जा भागीदारों का एक वैश्विक नेटवर्क बनाने में अधिक सक्रिय हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, वेनेजुएला के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में निर्यात बढ़ने से उसके उपभोक्ता बाजार का विस्तार करने, नया निवेश आकर्षित करने और उसके तेल व गैस उद्योग के पुनरुद्धार को बड़ी गति मिलेगी।
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