
NEET-UG 2026 री-एग्जाम को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। पेपर लीक की आशंकाओं को खत्म करने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) को प्रश्नपत्रों के परिवहन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वायुसेना ने पिछले चार दिनों में 200 से अधिक उड़ानें भरकर देशभर के 18 निर्धारित जोनों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने का अभियान चलाया है। यह ऑपरेशन 13 जून से शुरू हुआ था और परीक्षा से पहले लगभग पूरा कर लिया गया है।
बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्रों को अत्यंत गोपनीय तरीके से एयरलिफ्ट किया गया और बाद में कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सेना के हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई है। तमिलनाडु में मदुरै से तिरुनेलवेली तक प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए सेना के हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया, जबकि पूरे देश में बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। NTA ने इस बार 7-स्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
पेपर लीक विवाद के बाद NTA ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई अतिरिक्त कदम भी उठाए हैं। एजेंसी ने फर्जी पेपर लीक दावों और प्रतिरूपण (Impersonation) की शिकायतों के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। साथ ही परीक्षा कर्मियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाया गया है। NTA लगातार छात्रों और अभिभावकों से अपील कर रही है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचें।
21 जून को होने वाली री-NEET परीक्षा को लेकर सरकार इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही कारण है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और अनुवादकों को भी विशेष निगरानी और अलग-थलग व्यवस्था में रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वायुसेना और सेना की भागीदारी यह दर्शाती है कि परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की नजर अब इस बात पर है कि क्या ये अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम परीक्षा प्रणाली में विश्वास को फिर से मजबूत कर पाएंगे।
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