
राजधानी भोपाल में शहरी विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में एक ऐसे फुटपाथ का मामला सामने आया है, जिसे पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में उस पर रेलिंग लगाकर रास्ता ही बंद कर दिया गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस स्थान का उपयोग लोगों को सुरक्षित पैदल आवागमन के लिए करना था, वह अब केवल दिखावे की संरचना बनकर रह गया है। इस घटना को लोग खराब योजना और इंजीनियरिंग का एक और उदाहरण बता रहे हैं।
फुटपाथों का निर्माण आमतौर पर सड़क पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। लेकिन संबंधित स्थान पर रेलिंग लगाए जाने के बाद लोगों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ रहा है। इससे न केवल दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए भी आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण से पहले व्यावहारिक जरूरतों और जमीनी परिस्थितियों का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया।
नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले को सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से भी जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि यदि फुटपाथ का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है तो निर्माण पर खर्च की गई राशि का उद्देश्य अधूरा रह गया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा कर प्रशासन से जवाब मांगा है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में केवल निर्माण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि वे वास्तव में जनता के उपयोग में आ सकें।
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बुनियादी ढांचे के निर्माण में उपयोगकर्ता की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि डिजाइन और क्रियान्वयन के बीच समन्वय नहीं होता, तो ऐसी परियोजनाएं जनता के लिए लाभ के बजाय परेशानी का कारण बन जाती हैं। अब नागरिकों की मांग है कि संबंधित विभाग इस मामले की समीक्षा करे और फुटपाथ को पैदल यात्रियों के उपयोग के लिए तत्काल खोला जाए, ताकि सार्वजनिक संसाधनों का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
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