
कोलकाता/आदित्य शंकर तिवारी: पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। मदरसा शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू होगा। यह आदेश अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों, अनुमोदित SSK, MSK और मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसों पर लागू किया गया है।
मदरसा एजुकेशन ने जारी किया आदेश
पश्चिम बंगाल में सरकार के इस फैसले के तहत अब सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होगा। इससे पहले 13 मई को राज्य सरकार ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में भी ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी करने का आदेश जारी किया था।
मदरसा शिक्षा निदेशक की तरफ से जारी इस आदेश की कॉपी सभी जिलाधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों, पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन और अन्य संबंधित विभागों को भेजी गई है। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि इसे सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है।
‘जन गण मन’ के बराबर का दर्जा
पिछले दिनों पश्चिम बंगाल और असम में अपनी शानदार जीत के बाद, नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर का दर्जा देने का फैसला किया। सभी अधिकारियों के मुताबिक, इसका मकसद ‘वंदे मातरम्’ को भी उसी कानूनी दायरे में लाना है, जिसके तहत अभी राष्ट्रीय गान को सुरक्षा मिली हुई है. एक बार लागू होने के बाद, ‘वंदे मातरम’ गाए जाने के दौरान किसी भी तरह का अपमान या बाधा डालना एक ‘संज्ञेय अपराध’ माना जाएगा।
मौजूदा वक्त में कानून में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान या राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े मामलों में सजा का प्रावधान है, जिसमें जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। प्रस्तावित संशोधन इन प्रावधानों को ‘वंदे मातरम्’ तक भी बढ़ा देगा, जिसका मतलब है कि इसका उल्लंघन करने पर भी इसी तरह के कानूनी नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।
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