
देश का युवा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। नौकरियों के वादे, बेहतर भविष्य के सपने और न्याय की उम्मीदें सब कुछ मौजूदा व्यवस्था की अनदेखी की चढ़ चुके हैं। पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम और बयानों ने यह साफ़ कर दिया है कि सत्ता में बैठे लोग और उच्च पद पर आसीन व्यवस्थापिका युवाओं के मुद्दों को लेकर कितनी असंवेदनशील हो चुकी है।
युवाओं का अपमान और आक्रोश, हाल ही में जिस प्रकार युवाओं के न्यायसंगत विरोध और उनकी आवाज़ की तुलना अनसुने तरीके से अपमानजनक शब्दों से की गई, उसने देश के छात्र व युवा वर्ग में भारी रोष पैदा कर दिया है। सरकार और उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदार तंत्र द्वारा युवाओं के प्रति इस तरह के रवैये ने उनकी साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
39 दिनों में क्या बदला? युवाओं के लगातार प्रदर्शन और अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने के बावजूद, सरकार के रवैये में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। समय बीतता जा रहा है और देश का युवा वर्ग अब इस वादाखिलाफी को सहन करने के मूड में नहीं है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और युवाओं का एकजुट होना, जब सत्ता तंत्र युवाओं को दबाने और दरकिनार करने की कोशिश करता है, तब जन-आंदोलन का जन्म होता है। जो युवा कल तक अलग-थलग थे, अब वे एक मंच पर एकजुट हो रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक यह सवाल उठ रहा है “अगर यह पूरी शक्ति एक साथ खड़ी हो जाए, तो क्या होगा?
देश की पूरी युवा पीढ़ी आज इस व्यवस्था से ठगी हुई महसूस कर रही है। जिन युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है, जब उन्हें ही नजरअंदाज किया जाएगा, तो यह आक्रोश एक राजनीतिक और सामाजिक ‘टाइम बम’ का रूप ले लेगा। कॉकरोच जनता पार्टी के पक्ष में उठती यह आवाज़ सीधे तौर पर सरकार की नाकामियों और युवाओं के प्रति उसकी उपेक्षा का परिणाम है।
सरकार को यह समझना होगा कि युवाओं की अनदेखी करना और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाना भारी पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि युवाओं का यह बढ़ता आक्रोश आने वाले समय में क्या मोड़ लेता है। देश और दुनिया की तमाम बड़ी ख़बरों के लिए बने रहिए ब्रांडवाणी समाचार के साथ।








