
इतिहास अपने आप को दोहराता है, लेकिन जब इतिहास का क्रूर पन्ना दोहराया जाए, तो लोकतंत्र पर सवाल उठना लाजमी है। अंग्रेजों के जमाने में जलियांवाला बाग में निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई गई थीं, और आज देश की राजधानी जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं पर बर्बरता से लाठियां बरसाई जा रही हैं।
आज देश की स्थिति चिंताजनक मोड़ पर पहुंच चुकी है
बेरोजगारी चरम पर, युवा डिग्रियां हाथ में लिए सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं।
महंगाई आसमान पर, आम नागरिक की कमर टूट चुकी है।
किसान आत्महत्या पर मजबूर, अन्नदाता आज भी अपने हक और वादों की लड़ाई लड़ रहा है।
युवा लाठीचार्ज का शिकार, रोजगार मांगने पर युवाओं को भविष्य के बजाय लाठियां और पुलिसिया पुलिस की बर्बरता मिल रही है।
जंतर-मंतर से उठी यह आवाज अब केवल एक विरोध नहीं, बल्कि तानाशाही के मुखौटे को उतारने का संकल्प बन चुकी है। ‘कॉकरोच यूथ क्लब’ और देश भर के युवाओं का संदेश साफ है “अब और नहीं सहेंगे अन्याय!”
अगर जनता के हक की बात करना और सवाल पूछना अपराध है, तो फिर लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है? सरकार को अब युवाओं की आवाज दबानी बंद करनी होगी और उनके सवालों के जवाब देने होंगे।
देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार। खबर वही, जो सच है!








