मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में हड़ताल पर 8 हजार जूनियर डॉक्टर: मरीजों को भारी परेशानी

मध्यप्रदेश में लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) का कहना है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती हैं तब तक वे ओपीडी में सेवाएं नहीं देंगे। ऐसे में ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

JDA ने यह भी साफ किया कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में भी सिर्फ अति गंभीर मरीज होने पर ही सेवा देंगे। यानी प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं। इसका सीधा असर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ेगा।

पिछले साल अप्रैल से मिलना था नया स्टाइपेंड

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के अनुसार, सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन शासन के आदेश के अनुसार एक अप्रैल 2025 से लागू होना था। यह अब तक लागू नहीं किया है। कई बार निवेदन के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। इससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

JDA के नेतृत्व में करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस हड़ताल में शामिल हैं। विशेषज्ञों की माने तो यह सभी किसी मेडिकल कॉलेज की रीढ़ माने जाते हैं। जो ना केवल मेडिकल कॉलेजों का 70 प्रतिशत भार उठाते हैं बल्कि मरीजों के इलाज से लेकर उनकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी तक निभाते हैं। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

आदेश हुआ लेकिन संशोधन नहीं

जेडीए से डॉ. ब्रिजेंद्र ने कहा कि मध्य प्रदेश शासन के 7 जून 2021 के आदेश अनुसार, सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन एक अप्रैल 2025 से लागू होना था। इसके बावजूद अब तक न तो संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

HOD और डीन को सौंपा ज्ञापन

JDA से डॉ. ब्रिजेंद्र ने कहा, प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को डीन और सभी विभागों के एचओडी (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) को पत्र सौंप दिए गए हैं। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सुबह 9 बजे से सभी रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न हड़ताल पर बैठेंगे। आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा ओपीडी समेत सभी इलेक्टिव सर्विसेज का बहिष्कार करेंगे।

काली पट्टी लगाकर कर रहे 3 दिन से विरोध

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में डॉक्टरों ने प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में शुक्रवार से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। पिछले तीन दिनों से काली पट्टी लगाकर काम कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य जिम्मेदारों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करना है।

आदेश के क्रियान्वयन की मांग

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि उनका आंदोलन केवल शासन के पहले से जारी आदेश के क्रियान्वयन और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर विरोध को आगे और तेज किया जा सकता है।

2 साल पहले दो घंटे चली हड़ताल

प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर और रेसिडेंट डॉक्टरों का स्टायपेंड बढ़ाने के लिए दो साल पहले नए आदेश जारी किए गए थे। 13 मार्च 2024 को जारी आदेश के अनुसार जूनियर डॉक्टरों के स्टायपेंड में तीन हजार रुपए तक और सीनियर रेसिडेंट डॉक्टरों के स्टायपेंड में चार हजार रुपए तक बढ़ोतरी की गई थी।

यह आदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किया था। इसका लाभ 1 अप्रैल 2023 से दिया जाना था।

इससे पहले जूनियर डॉक्टरों ने स्टायपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की थी। इस दौरान जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद रखा था।

नवंबर 2022 में बढ़ा था स्टायपेंड

सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पीजी कर रहे मेडिकल स्टूडेंट्स (जूनियर डॉक्टरों) के स्टायपेंड में आखिरी बार नवंबर 2022 में बढ़ोतरी हुई थी। मालूम हो कि जून 2021 में राज्य सरकार ने जूनियर डॉक्टरों के स्टायपेंड में बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर हर साल करने का प्रावधान किया था।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि स्टायपेंड बढ़ाने का प्रावधान होने के बावजूद अप्रैल 2022 के बजाय बढ़ोतरी नवंबर 2022 में की गई। इसके बाद नवंबर 2022 के बाद अप्रैल 2023 में कोई वृद्धि नहीं हुई।

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