
लखनऊ: राजधानी के हजरतगंज स्थित नरही क्षेत्र में संचालित लगभग 90 साल पुराने सहायता प्राप्त विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल को खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में छात्राओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। विद्यालय परिसर में रविवार को बड़ी संख्या में छात्राओं ने स्कूलों पर बैठ कर गुहार लगाई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्कूल को बचाने की भावुक अपील की। प्रदर्शन के दौरान कई छात्राओं की आंखें नम हो गईं और उन्होंने कहा कि यदि स्कूल बंद हो गया तो उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
विद्यालय प्रबंधन का दावा है कि यह संस्थान वर्ष 1936 से संचालित हो रहा है और हजारों छात्राओं को शिक्षा दे चुका है। प्रबंधन के अनुसार स्कूल की जमीन और भवन को लेकर विवाद के बीच संस्थान को खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे करीब 250 छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। उनका आरोप है कि विद्यालय पर जबरन कब्जे की कोशिश की जा रही है।
धरने में शामिल छात्राओं ने हाथों में तख्तियां लेकर “हमारा स्कूल बचाओ” और “हमारा भविष्य सुरक्षित करो” जैसे नारे लगाए। कई छात्राओं ने कहा कि उनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वे निजी विद्यालयों की महंगी फीस वहन नहीं कर सकते। ऐसे में यदि यह स्कूल बंद होता है तो उनकी शिक्षा बीच में ही रुक सकती है। अभिभावकों ने भी प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि वर्षों से यह विद्यालय क्षेत्र की बेटियों को कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। उनका कहना है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह संस्थान एक महत्वपूर्ण सहारा है।
मामले में शिक्षक संगठनों ने भी जिला प्रशासन की छापेमारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय को बंद कराने के पीछे सुनियोजित साजिश हो सकती है। शिक्षकों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर स्कूल बंद नहीं होने देंगे और आवश्यकता पड़ी तो विद्यालय के मुख्य द्वार पर ही क्लास संचालित करने वाले हैं। इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि एक ओर सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश देती है और दूसरी ओर बेटियों के स्कूल पर संकट खड़ा होना पड़ता है। उन्होंने विद्यालय को सुरक्षित रखने की मांग की।
वहीं संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉ. प्रदीप कुमार ने स्पष्ट किया कि मान्यता प्राप्त विद्यालय को न तो बेचा जा सकता है और न ही मनमाने तरीके से बंद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है। विद्यालय से जुड़ा विवाद फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। जिला जज की अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को प्रस्तावित है। तब तक छात्राएं, अभिभावक और शिक्षक विद्यालय को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं। छात्राओं का एक ही सवाल है “अगर स्कूल बंद हो गया, तो हम पढ़ने कहां जाएंगे?”
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