
सुप्रीम कोर्ट में एक अनोखी याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन मानते हुए उनसे जुड़ी कुछ मांगें उठाई गई थीं। हालांकि अदालत ने इस याचिका को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया और इसे तुरंत खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर नाराजगी भी जताई।
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की याचिकाएं न्यायपालिका के समय की बर्बादी हैं। CJI ने हल्के व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि क्या ऐसी पिटीशन आधी रात को बैठकर तैयार की जाती हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद कोर्ट रूम में मौजूद लोगों के बीच भी हलचल देखने को मिली।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय के सामने ऐसे मुद्दे लाना उचित नहीं है जिनका कोई ठोस कानूनी आधार न हो। अदालत ने कहा कि देश में पहले से ही कई महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं और ऐसे में अदालत का समय अनावश्यक याचिकाओं में खर्च करना सही नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जनहित याचिका की व्यवस्था का उद्देश्य गंभीर और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों को उठाना है, न कि ऐसे मामलों को सामने लाना जिनका कोई व्यावहारिक या कानूनी महत्व नहीं है।
एक साथ 5 याचिकाएं खारिज
बताया जा रहा है कि इस विषय से जुड़ी कुल पांच याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। अदालत ने सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए उन्हें खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के मामलों पर न्यायिक समय खर्च करना उचित नहीं माना जा सकता।









