मोहन यादव सरकार की जड़ें खोदते ‘विभीषण’: रामखेलावन पटेल का ‘आंदोलन’ या सत्ता के लिए ब्लैकमेलिंग?

विशेष रिपोर्ट: ब्रांडवाणी समाचार

भोपाल/अमरपाटन: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भाजपा के एक नेता ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावती बिगुल फूंककर हलचल मचा दी है। भाजपा के पूर्व मंत्री और अमरपाटन के कद्दावर नेता रामखेलावन पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के खिलाफ अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके लिए ‘संगठन से ज्यादा ‘कुर्सी की मलाई’ सर्वोपरि है।

जहां एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के प्रयास में जुटे हैं, वहीं रामखेलावन पटेल विकास की पटरी पर समस्या बनकर खड़े हो गए हैं, वे अपने विवादित बयान से सत्ता में चर्चा का विषय रहते हैं।2019 में डंडा काण्ड फिर 2022 में उनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे अफसर को “उल्टा लटका देने” की धमकी दे रहे थे। ऐसे बयानों से पार्टी की फजीहत होने पर अक्सर नाराजगी की खबरें आती रही हैं।

प्रेशर पॉलिटिक्स या वास्तिविक मकसद

डॉ. मोहन यादव की सरकार का मुख्य लक्ष्य खनिज संसाधनों के सही दोहन से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारना है। लेकिन भाजपा के ही पूर्व मंत्री, कंपनियों को निशाना बनाकर, जनता को गुमराह कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या यह वाकई जनहित में है, या फिर माइनिंग कंपनियों से अपनी ‘लेन-देन’ की सेटिंग न हो पाने का गुस्सा?

सरकार को कठघरे में खड़े करने की रणनीति

सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की नीतियां, ताकि सरकार को अस्थिर और बदनाम किया जा सके। रामखेलावन पटेल अक्सर खुद को पिछड़ा वर्ग का मसीहा बताते हैं, लेकिन जब-जब उन्हें सत्ता के गलियारों से बाहर किया जाता है, उन्हें अचानक ‘जनता की याद’ आने लगती है।

सरकार घुटने टेके और उन्हें दोबारा मंत्री पद का ‘तोहफा’ मिले

संगठन में उनकी गिरती साख को ‘विद्रोही तेवरों’ से ऑक्सीजन दी जा सके।
ब्रांडवाणी का तीखा सवाल: “क्या डॉ. मोहन यादव जैसे अनुशासित मुख्यमंत्री के राज में एक पूर्व मंत्री को इतनी छूट मिलनी चाहिए कि वह सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली गतिविधियों का नेतृत्व करे?”

भाजपा अपने सगंठनात्मक और प्रशासनिक अनुशासन के लिए जानी जाती है, लेकिन रामखेलावन पटेल के मामले में प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी कार्यकर्ताओं को खल रही है। निचले स्तर का कार्यकर्ता पूछ रहा है, “क्या हम दिन-रात मेहनत इसलिए करते हैं कि हमारे ही नेता सरकार की छवि धूमिल करें?”

दोहरे चरित्र के पुरोधा

यह ‘डबल गेम’ अब ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला है। एक तरफ भाजपा की सदस्यता और दूसरी तरफ सरकार के खिलाफ सड़कों पर नौटंकी यह दोहरा चरित्र जनता के सामने बेनकाब हो चुका है।

रामखेलावन पटेल को यह मुगालता छोड़ देना चाहिए कि वे सरकार को डराकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक लेंगे। डॉ. मोहन यादव की सरकार विकास के पथ पर अग्रसर है और ऐसे रोड़ों को हटाना वह बखूबी जानती है। अब गेंद भाजपा हाईकमान के पाले में है कि क्या वे ऐसे ‘ब्लैकमेलर’ को ढोते रहेंगे या उसे बाहर का रास्ता दिखाकर एक मिसाल पेश करेंगे?

ब्यूरो रिपोर्ट: ब्रांडवाणी समाचार

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  • Brandwaani Desk

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