
मध्य प्रदेश के एक विभाग से जुड़ा मामला इन दिनों प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, एक निजी कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक ने विभाग के एक प्राइवेट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी से संपर्क कर अपने पुत्र को नौकरी दिलाने की इच्छा जताई थी। बताया जा रहा है कि इस बातचीत के बाद विभागीय स्तर पर कई गतिविधियां तेज हो गईं और मामला केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा।
जानकारी के मुताबिक, विभाग के कुछ अधिकारियों पर एक प्रभावशाली व्यक्ति के लिए विशेष व्यवस्थाएं करने का दबाव बनाया गया। चर्चा यह भी है कि विभागीय अधिकारियों को एक खास व्यक्ति की मदद करने के लिए लगातार निर्देश दिए जा रहे थे। हालांकि जब संबंधित व्यक्ति की पृष्ठभूमि और गतिविधियों की जांच शुरू हुई, तब कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आने लगीं।
सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान यह पता चला कि संबंधित कंपनी के नाम पर करोड़ों रुपये की जमीन आवंटित की गई थी और वहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य की तैयारी चल रही थी। बताया जा रहा है कि इस निर्माण से पहले शुरुआती चरण में केवल कुछ लोगों को रोजगार देने की योजना थी, लेकिन जमीन और परियोजना से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। खास बात यह है कि मामले में कई गंभीर चर्चाओं के बावजूद संबंधित पीएस अधिकारी अब तक सार्वजनिक रूप से चुप्पी साधे हुए हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, जबकि आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है।
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