
जबलपुर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 66 लाख रुपये के कथित गबन मामले ने तूल पकड़ लिया है। ओपीडी पर्चियों से वसूली गई राशि को वर्षों तक बैंक खाते में जमा नहीं किए जाने के खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक पाठक ने इस मामले पर गंभीर आपत्ति जताते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मरीजों से लगातार पर्ची शुल्क लिया जाता रहा, लेकिन वह राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हुई, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 5 वर्षों तक इतनी बड़ी अनियमितता अधिकारियों की नजर से कैसे बची रही, यह समझ से परे है। यदि समय-समय पर खातों और रिकॉर्ड का मिलान किया जाता, तो यह घोटाला पहले ही सामने आ सकता था। अभिषेक पाठक ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने जबलपुर एसपी को शिकायत सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा जांच समिति गठित किए जाने और मामले की जानकारी पुलिस को सौंपे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि अब जनता पूरे मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रही है।
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