
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के तहत जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ये विद्यालय अब केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक शिक्षा, तकनीक और भारतीय संस्कारों के समन्वय का केंद्र बन चुके हैं।
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इन विद्यालयों में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योग, ध्यान, नैतिक शिक्षा और डिजिटल लर्निंग को शिक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बनाया गया है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
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ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अब स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर लैब और ऑडियो-वीडियो आधारित शिक्षण जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं। इससे विज्ञान और गणित जैसे विषयों को सरल और रोचक तरीके से समझाया जा रहा है, जिससे छात्रों की सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है।
विद्यालयों में सुबह की प्रार्थना सभा के साथ योगाभ्यास को भी अनिवार्य किया गया है, जिससे बच्चों में अनुशासन, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित हो रही है। साथ ही नैतिक शिक्षा के माध्यम से उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, इन विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों से पीछे न रहें।
वर्तमान में प्रदेश में 103 सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं, जबकि 20 नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं। वर्ष 2017 के बाद सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में विस्तार करते हुए इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया है, जिससे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।
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