
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार तकनीकी शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से सीधे जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य का लक्ष्य वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था हासिल करने के साथ-साथ छात्रों को व्यावहारिक और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। इसके तहत इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए कम से कम दो इंडस्ट्रियल विजिट अनिवार्य करने की तैयारी की जा रही है। सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों को एक्सप्रेसवे, डैम और निर्माण स्थलों का अनुभव मिलेगा, जबकि मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल छात्रों को ईवी और औद्योगिक इकाइयों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर और ईवी सेक्टर को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रमों को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार अपडेट किया जा रहा है। सरकार एआई आधारित शिक्षा और डिजिटल लर्निंग पर भी विशेष ध्यान दे रही है। विभिन्न संस्थानों के सहयोग से नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कोर्स तैयार किए जा रहे हैं, जिससे छात्रों को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके।
इसके अलावा प्लेसमेंट पोर्टल के माध्यम से हजारों छात्रों को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई है। नौकरी पोर्टल के साथ मिलकर विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिससे युवाओं को निजी और वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी पहल का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना है, ताकि प्रदेश के युवा कौशल और तकनीक के दम पर आत्मनिर्भर बन सकें।
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