
प्रदेश के एक महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ एक महिला आईपीएस अधिकारी इन दिनों अपने सख्त और तेज़ प्रशासनिक रवैये को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। विभागीय गलियारों में उनके काम करने के तरीके को लेकर तरह-तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि किसी भी फाइल, प्रोजेक्ट या प्रशासनिक निर्णय में छोटी सी गलती मिलने पर वह संबंधित अधिकारी या कर्मचारी से तुरंत जवाब मांग लेती हैं। यही वजह है कि विभाग में अब हर स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता देखी जा रही है और अधिकारी अपने काम को पहले से ज्यादा सावधानी के साथ तैयार कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में आयोजित एक बैठक के दौरान महिला अधिकारी ने कई अहम फाइलों और लंबित मामलों को लेकर अधिकारियों से सीधे सवाल किए। बताया जा रहा है कि उन्होंने बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों से भी स्पष्ट शब्दों में जानकारी मांगी और कुछ मामलों में देरी को लेकर नाराजगी जताई। बैठक के दौरान माहौल इतना गंभीर हो गया कि कई अधिकारी खुलकर प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए। विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि अब बैठकों में बिना पूरी तैयारी के पहुंचना जोखिम भरा माना जा रहा है।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि महिला आईपीएस अधिकारी ने विभाग में जवाबदेही और अनुशासन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। कहा जा रहा है कि वे फाइलों की बारीकी से समीक्षा करती हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं करतीं। कई कर्मचारियों का मानना है कि उनकी सख्ती से कामकाज की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है, जबकि कुछ लोग इसे अत्यधिक दबाव वाली कार्यशैली के रूप में देख रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर विभाग की ओर से इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल विभाग के भीतर एक ही चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है कि अब बैठकों में केवल औपचारिकता से काम नहीं चलेगा। अधिकारी और कर्मचारी दोनों अपने जवाबों और फाइलों की तैयारी पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में इस महिला आईपीएस अधिकारी की कार्यशैली को लेकर उत्सुकता भी है और दबाव भी, क्योंकि उनके सख्त रवैये ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
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