
नई दिल्ली: भारतीय शतरंज (चेस) के युवा जादूगर आर. प्रग्गनानंदा ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर तिरंगा लहराते हुए इतिहास रच दिया है। प्रग्गनानंदा ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रतिष्ठित ‘नॉर्वे चेस चैंपियनशिप 2026’ का खिताब अपने नाम कर लिया है। वे इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाले भारत के पहले शतरंज खिलाड़ी बन गए हैं। प्रग्गनानंदा की इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें विशेष बधाई दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रग्गनानंदा की सराहना करते हुए लिखा, “प्रग्गनानंदा को इस शानदार कामयाबी के लिए बहुत-बहुत बधाई। यह वास्तव में एक अद्भुत और असाधारण उपलब्धि है, जो खेल के प्रति उनकी निरंतर उत्कृष्टता और समर्पण को दर्शाती है। मैं उनके उज्जवल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं देता हूं।”
आखिरी राउंड में जर्मनी के कीमर को दी मात
प्रग्गनानंदा ने क्लासिकल चेस इवेंट के 10वें और अंतिम राउंड में जर्मनी के मजबूत खिलाड़ी विंसेंट कीमर को करारी शिकस्त देकर खिताबी जीत पक्की की। मुकाबले के दौरान प्रग्गनानंदा ने कीमर द्वारा की गई रणनीतिक गलतियों का बखूबी फायदा उठाया और मैच की 45वीं चाल में उन्हें आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया। इस खिताबी जीत के साथ प्रग्गनानंदा ने टूर्नामेंट का अंत 5 शानदार जीत, 2 हार और 2 ड्रॉ के साथ कुल 18 अंकों (प्वाइंट्स) के साथ शीर्ष पर रहते हुए किया। टूर्नामेंट में उनके जो दो मुकाबले ड्रॉ रहे थे, उनका फैसला ‘आर्मागेडन गेम’ (टाईब्रेकर) के जरिए निकाला गया, जहां दोनों ही बार भारतीय ग्रैंडमास्टर बाजी मारने में सफल रहे।
अंतिम पायदान से शीर्ष तक का चमत्कारी सफर, कार्लसन की बराबरी की
इस टूर्नामेंट में प्रग्गनानंदा की वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। प्रतियोगिता के छठे दौर (राउंड) की समाप्ति के बाद वे अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर खिसक गए थे और उनके चैंपियन बनने की उम्मीदें लगभग खत्म मानी जा रही थीं। लेकिन इसके बाद 20 वर्षीय भारतीय ग्रैंडमास्टर ने दिमागी जंग में वो आक्रामकता दिखाई जिसने इतिहास पलट दिया।
प्रग्गनानंदा ने टूर्नामेंट में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस जादुई सफर के दौरान उन्होंने विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और तत्कालीन चैंपियन मैग्नस कार्लसन को टूर्नामेंट में दूसरी बार धूल चटाई। इसके साथ ही उन्होंने अपने ही देश के दिग्गज खिलाड़ी डी. गुकेश के खिलाफ भी एक शानदार जीत दर्ज की। साल 2021 के बाद इस बेहद कठिन टूर्नामेंट में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतने वाले प्रग्गनानंदा दुनिया के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले यह अद्भुत रिकॉर्ड सिर्फ महान खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन के नाम दर्ज था।
ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय मां की भविष्यवाणी को दिया
अपनी इस ऐतिहासिक और यादगार जीत के बाद भावुक हुए आर. प्रग्गनानंदा ने इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को दिया। प्रग्गनानंदा ने मुस्कुराते हुए बताया, “मेरी मां ने मुझसे कहा था कि जैसे ही नया महीना (जून) शुरू होगा, मेरा प्रदर्शन बेहद शानदार रहेगा। मां की कही यह बात सच साबित हुई और उनकी इसी प्रेरणा व आशीर्वाद के दम पर मैंने लगातार चार मुकाबले जीतकर यह खिताब अपने नाम किया।”
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