
प्रयागराज से पुणे जा रही थी बच्ची, बीना स्टेशन के पास घायल हालत में मिली; सोशल मीडिया और पुलिस की तत्परता से हुई पहचान, डॉक्टरों की टीम बचाने में जुटी।
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। बीना रेलवे स्टेशन क्षेत्र के पास गंभीर रूप से घायल और अज्ञात अवस्था में मिली किशोरी की पहचान आखिरकार हो गई है। वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की रहने वाली 14 वर्षीय अंकिता द्विवेदी है, जो अपनी मां और छोटे भाई के साथ ट्रेन से पुणे जा रही थी। हादसे के बाद वह चलती ट्रेन से गिर गई और गंभीर रूप से घायल हो गई।
जानकारी के अनुसार, अंकिता गुरुवार रात ट्रेन नंबर 01407 पुणे स्पेशल के कोच S-4 में अपनी मां नीरज द्विवेदी और दो वर्षीय छोटे भाई के साथ सफर कर रही थी। बताया जा रहा है कि रात के समय वह बाथरूम जाने के लिए सीट से उठी थी। इसी दौरान बीना स्टेशन क्षेत्र के पास किसी कारणवश उसका संतुलन बिगड़ गया और वह चलती ट्रेन से नीचे गिर गई। हादसे में उसके सिर, चेहरे और आंखों में गंभीर चोटें आईं।
सोशल मीडिया पर मदद की गुहार, फिर मिला सुराग
अंकिता के अचानक लापता होने के बाद परिवार के लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी तलाश शुरू की। परिजनों ने आम लोगों और रेलवे प्रशासन से मदद की अपील करते हुए बच्ची की जानकारी साझा की। परिवार लगातार उसकी तलाश में जुटा रहा, जबकि उसी दौरान अंकिता सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रही थी।
पुलिस की सतर्कता से हुई पहचान
बीएमसी पुलिस चौकी में पदस्थ प्रधान आरक्षक सोनू जाटव ने बताया कि घायल बच्ची की तस्वीर तत्काल विभिन्न पुलिस, रेलवे और सोशल मीडिया ग्रुप्स में साझा की गई। तस्वीरों का मिलान होने के बाद परिजनों तक सूचना पहुंची और बच्ची की पहचान अंकिता द्विवेदी के रूप में हुई। सूचना मिलते ही उसके पिता संजय द्विवेदी और अन्य परिजन सागर के लिए रवाना हो गए।
वेंटिलेटर पर है अंकिता, हालत नाजुक
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन के अनुसार अंकिता के सिर में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं। उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और उसे आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
डॉक्टरों के मुताबिक न्यूरोसर्जरी, क्रिटिकल केयर समेत चार से अधिक विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उसके उपचार में जुटी हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं और बच्ची को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बना मामला
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया, पुलिस और चिकित्सा टीम की तत्परता ने एक बिछड़े परिवार को उसकी बेटी तक पहुंचाने का काम किया। हालांकि अंकिता अभी भी जिंदगी की कठिन लड़ाई लड़ रही है, लेकिन परिवार को अपनी लापता बेटी का सुराग मिल जाना किसी राहत से कम नहीं है।








