
देश की राजनीति में तेजी से चर्चा बटोर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) एक बार फिर सुर्खियों में है। दिलचस्प बात यह है कि इस संगठन के पास न कोई पारंपरिक कार्यालय है, न नियमित राजनीतिक बैठकें और न ही बड़े-बड़े संगठनात्मक ढांचे। इसके बावजूद यह आंदोलन देश के कई शहरों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। संगठन से जुड़े लोग दावा करते हैं कि पूरा नेटवर्क कॉल, चैट ग्रुप, सोशल मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशन के जरिए संचालित किया जा रहा है। हाल के दिनों में अमृतसर, जयपुर, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में CJP से जुड़े कार्यक्रमों और प्रदर्शनों ने लोगों का ध्यान खींचा है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके समर्थक खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग बताते हैं। संगठन का कहना है कि वह युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों की आवाज को डिजिटल माध्यमों के जरिए एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है। समर्थकों का दावा है कि बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा अनियमितताओं और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर लोगों का बढ़ता असंतोष इस आंदोलन की ताकत बन रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने कई राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान भी आकर्षित किया है।
हाल ही में CJP को लेकर एक नया विवाद तब खड़ा हुआ जब उसके विरोधियों ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन देश को नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसे राजनीतिक बदलावों की दिशा में धकेलना चाहता है। हालांकि संगठन से जुड़े लोगों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की अराजकता नहीं बल्कि लोकतांत्रिक दबाव के जरिए व्यवस्था में सुधार लाना है। संगठन के समर्थक लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और बदलाव संविधानिक तरीकों से ही लाया जाएगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि CJP की सबसे बड़ी ताकत उसका डिजिटल मॉडल है। बिना बड़े संसाधनों, कार्यालयों और पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे के भी यह युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि यह देखना अभी बाकी है कि सोशल मीडिया पर दिख रही लोकप्रियता वास्तविक राजनीतिक प्रभाव में बदल पाती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि कॉल, चैट और ऑनलाइन नेटवर्क के सहारे चल रहा यह प्रयोग देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे चुका है।
- cjp-running-through-calls-and-chats-what-is-cockroach-janta-party-plan








