
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पेपर लीक विवाद के बाद रद्द की गई परीक्षा के पुनः आयोजन में देशभर और विदेशों के केंद्रों पर 22 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे।
पेपर लीक के बाद दोबारा करानी पड़ी परीक्षा
मई में आयोजित मूल परीक्षा पर प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे थे, जिसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया। इस निर्णय ने लाखों छात्रों को एक बार फिर तैयारी और मानसिक दबाव के दौर से गुजरने पर मजबूर कर दिया।
कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ आयोजन
री-एग्जाम के लिए देशभर में हजारों परीक्षा केंद्र बनाए गए। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना था।
छात्रों ने बताया पेपर चुनौतीपूर्ण
परीक्षा के बाद कई अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को अपेक्षा से अधिक कठिन बताया। विशेष रूप से फिजिक्स और केमिस्ट्री सेक्शन को लेकर छात्रों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई उम्मीदवारों का कहना है कि री-एग्जाम ने प्रतिस्पर्धा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
भविष्य पर टिकी उम्मीदें
NEET-UG भारत में एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश का प्रमुख माध्यम है। हर वर्ष लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण चयन दर बेहद कम रहती है। ऐसे में इस परीक्षा का महत्व और दबाव दोनों ही असाधारण हैं।
परिणाम पर सबकी नजर
अब छात्रों और अभिभावकों की निगाहें परिणामों और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि री-एग्जाम का सफल आयोजन परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।








