
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर तेल कंपनियों पर निशाना साधते हुए पेट्रोल और ईंधन की कीमतों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल बेचने वाली कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय उनसे अधिक कीमत वसूल रही हैं। उन्होंने कंपनियों से तुरंत पेट्रोल के दाम घटाने की मांग करते हुए कहा कि अब जनता को सस्ते कच्चे तेल का सीधा लाभ मिलना चाहिए।
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें कम हो चुकी हैं, तब पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें उसी अनुपात में कम क्यों नहीं की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां बाजार की स्थिति का फायदा उठाकर अतिरिक्त मुनाफा कमा रही हैं। ट्रम्प का कहना है कि यदि लागत कम हुई है, तो उसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए और कंपनियों को पारदर्शिता के साथ मूल्य निर्धारण करना चाहिए।
हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने, आपूर्ति की स्थिति सुधरने और उत्पादन बढ़ने की उम्मीदों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आई है। इसके बावजूद कई देशों में खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होती। इसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, कर, डीलर कमीशन, मार्केटिंग मार्जिन और स्थानीय टैक्स भी शामिल होते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों पर ईंधन के दाम घटाने का दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
ट्रम्प के इस बयान को अमेरिका की घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ईंधन की कीमतें अमेरिका में हमेशा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा रही हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ता है। ट्रम्प पहले भी कई बार तेल कंपनियों और ऊर्जा बाजार को लेकर सार्वजनिक बयान दे चुके हैं और उपभोक्ताओं को राहत देने की वकालत करते रहे हैं।
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