
मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा गया एक कथित पत्र सामने आया। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि पिछले ढाई साल से उन्हें केवल असहयोग और उपेक्षा का सामना करना पड़ा है। पत्र सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर अंदरूनी कलह का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।
कथित पत्र में इंदौर से जुड़े विकास कार्यों में देरी, प्रशासनिक सहयोग की कमी और अपनी बात को गंभीरता से नहीं लिए जाने की शिकायत दर्ज की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें सार्वजनिक मंच से अपनी बात रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
मामले के तूल पकड़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इंदौर की उपेक्षा का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि पत्र का उद्देश्य राजनीतिक विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि शहर के विकास से जुड़े मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
वहीं कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की अंदरूनी खींचतान का सबूत बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि कैबिनेट मंत्री ही खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, तो इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। पार्टी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की है।
फिलहाल इस मुद्दे ने मध्य प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस पत्र और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
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