
सागर, मध्य प्रदेश।मनीष कुमार चौबे| सागर पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह बेरोजगार और सामान्य लोगों को पैसे का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इन्हीं दस्तावेजों से फर्जी फर्म बनाकर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। प्रारंभिक जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों और 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है।
दस्तावेज लेकर खुलवाते थे फर्जी फर्म और बैंक खाते
पुलिस जांच के अनुसार गिरोह के सदस्य बेरोजगार लोगों को कमीशन और पैसे देने का लालच देते थे। इसके बाद उनके आधार सहित अन्य दस्तावेज प्राप्त कर उन्हीं के नाम से फर्जी फर्म तैयार की जाती थी। इन फर्मों के नाम पर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे।
पुलिस का कहना है कि इन खातों को बाद में गिरोह अपने नियंत्रण में ले लेता था। इनका इस्तेमाल साइबर ठगी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त रकम के लेन-देन और सर्कुलेशन के लिए किया जा रहा था। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
मामला तब सामने आया जब 13 अगस्त को रोहित पिता रूपराज पटेल ने मकरोनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्म बनाई गई है। इसके बाद फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खोला गया। पुलिस के मुताबिक, ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ के नाम से खोले गए खाते में फरवरी 2026 से करीब छह महीने में लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन हुआ।
पूछताछ में सामने आया नेटवर्क, दो आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित कर बैंक खातों, फर्मों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया। जांच के दौरान धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पुलिस को नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार धर्मेन्द्र नाहर ने बताया कि उसने यह काम भोपाल निवासी अमित विश्वकर्मा से मुंबई में सीखा था। पूछताछ में ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग से प्राप्त रकम के सर्कुलेशन के लिए बैंक खातों के इस्तेमाल की बात सामने आने का दावा किया गया है। इसके बाद धर्मेन्द्र ने सोनू दांगी और भोपाल निवासी सरमन उर्फ शुभम रैकवार, विपिन गिरी तथा स्वर्णेन्द्र पांडे के साथ मिलकर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने का काम शुरू किया।
पुलिस ने अब तक 16 से अधिक फर्मों की पहचान की है। इनमें ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स, शर्मा जी इंटरप्राइजेस, सौरभ इंटरप्राइजेस, माखन इंटरप्राइजेस, अंकेश इंटरप्राइजेस, तनविक इंटरप्राइजेस और यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स शामिल हैं।
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5.50 करोड़ से अधिक के लेन-देन की जांच
पुलिस के अनुसार इन फर्जी फर्मों से जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस अब सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण कर रही है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खाते खुलवाने की प्रक्रिया में किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही। पुलिस के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन या बैंक खातों के संचालन में किसी स्तर पर लापरवाही या आपराधिक संलिप्तता मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में धर्मेन्द्र नाहर और सोनू दांगी गिरफ्तार हैं। वहीं अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे की भूमिका की जांच की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें प्रयास कर रही हैं।
पुलिस ने लोगों से की बैंक खाते नहीं देने की अपील
सागर पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराध को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि किसी व्यक्ति को कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या बैंकिंग संबंधी जानकारी नहीं देनी चाहिए।
पुलिस ने यह भी चेताया कि किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म खुलवाकर उसका संचालन किसी और को देना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। यदि ऐसे खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में होता है तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।
सागर पुलिस की जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों और 5.50 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। दो आरोपी गिरफ्तार हैं और तीन अन्य की तलाश जारी है। पुलिस अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन, फर्जी दस्तावेज और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
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