
नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए पूर्ण रणनीतिक आत्मनिर्भरता को एक ‘अनिवार्य राष्ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित किया। लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने भारत को अगली पीढ़ी की डिफेंस टेक्नोलॉजी का ग्लोबल सप्लायर बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत सिर्फ एक बाजार बनकर नहीं रह सकता; देश को ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हाइपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी में वैश्विक स्तर पर लीडरशिप हासिल करनी होगी।
सप्त सिंधु सभ्यता का आह्वान और ‘सप्त शक्ति’ रणनीति की घोषणा
संबोधन में प्रधानमंत्री ने प्राचीन ‘सप्त सिंधु’ की सभ्यतागत शक्ति का स्मरण करते हुए देश के लिए एक शक्तिशाली रणनीतिक ढांचे ‘सप्तधारा’ या ‘सप्त शक्ति’ का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की अपार क्षमता पर आधारित ये सात गतिशील धाराएं देश को विकास की अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाएंगी। पीएम मोदी ने कहा, “सप्त-धारा की इस रणनीति की जबरदस्त क्षमता के साथ हम देश को एक नई गति और नई ऊंचाइयों की ओर आक्रामक रूप से आगे बढ़ाएंगे।”
‘रक्षा शक्ति’ को माना पांचवीं धारा, साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री ने ‘रक्षा शक्ति’ को इस सप्त-धारा रणनीति की महत्वपूर्ण पांचवीं धारा के रूप में वर्गीकृत किया। राष्ट्रीय सुरक्षा में डिजिटल मोर्चे के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने साइबर सुरक्षा को रक्षा का अभिन्न अंग बताया। पीएम ने कहा कि भारत की डिजिटल सीमाओं और वैश्विक साइबर परिदृश्य की रक्षा के लिए भारतीय युवाओं की जबरदस्त डिजिटल क्षमता का आक्रामक और सक्रिय उपयोग किया जाएगा।
आयात पर निर्भरता खत्म करने का पक्का इरादा
आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अब अन्य राष्ट्रों पर आश्रित रहने की प्रवृत्ति को छोड़ना होगा। विदेश से सस्ती और जल्दी चीजें मिल सकती हैं, लेकिन उनसे हमारी अपनी क्षमताएं और ताकत नहीं बनती। इसलिए, मेक इन इंडिया, स्वदेशी और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे आंदोलनों को मजबूत कर अपने हितों की रक्षा खुद करनी होगी।
बदलते युद्धक्षेत्र: डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरे का अलर्ट
आधुनिक युद्ध पद्धतियों में आ रहे बदलावों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज के समय में बैंकिंग सेक्टर, डेटा सेंटर और रिफाइनरीज जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सीधे टारगेट पर हैं। इन उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए ही ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की गई थी, जिस पर वर्तमान में तेजी से काम चल रहा है।
12 वर्षों में रक्षा उत्पादन 4 गुना और एक्सपोर्ट 50 गुना बढ़ा
पिछले 12 वर्षों के रक्षा सुधारों के आंकड़े सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश का रक्षा उत्पादन लगभग 4 गुना बढ़ चुका है। वहीं भारत का रक्षा निर्यात (Defense Export) लगभग 50 गुना बढ़कर करीब 100 देशों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि चुनौती चाहे सीमा के अंदर हो या बाहर, भारत आज हर स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैश्विक मंच पर देश की साख लगातार मजबूत हो रही है।
सिविल डिफेंस का मॉडर्न नेटवर्क और नारी शक्ति का नेतृत्व
प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा में नागरिकों की भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि पिछली शताब्दी के हिसाब से बने पुराने सिविल डिफेंस सिस्टम को अब बदला जाएगा। आने वाले दिनों में मॉडर्न चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत नेटवर्क और वॉलंटरी फोर्स तैयार की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि एनडीए (NDA) से पास आउट हो रही बेटियां पूरे आत्मविश्वास के साथ देश की सेनाओं का नेतृत्व कर रही हैं।
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