
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बहुचर्चित बदायूं कांड को 12 साल पूरे होने के बाद एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बदायूं से लेकर राजधानी लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, हरदोई, शाहजहांपुर, कन्नौज और उन्नाव जैसे कई जिलों में अचानक लगाए गए बड़े-बड़े पोस्टर्स और होर्डिंग्स ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
इन पोस्टर्स में 2014 के चर्चित बदायूं डबल रेप और हत्या कांड का उल्लेख करते हुए तत्कालीन समाजवादी सरकार पर निशाना साधा गया है। पोस्टर्स में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ एक बच्ची का चेहरा ढका हुआ चित्र भी दिखाया गया है। उस पर लिखा गया संदेश “महिला विरोधी सपाई” और स्लोगन “बेटियों की चीखें गुंडों का शोर, सपा राज में यही था दौर” चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि अब तक किसी भी संगठन या राजनीतिक दल ने इन पोस्टर्स को लगाने की जिम्मेदारी नहीं ली है।
बदायूं शहर के कटरा क्षेत्र में 2014 में दो शाक्य समाज की बहनों की मौत का मामला उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था। इस घटना के बाद प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर तत्कालीन सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे। अब 12 साल बाद उसी मामले को फिर से पोस्टर वॉर के जरिए उठाए जाने से राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पुराने मामलों को फिर से जनता के बीच लाकर भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच सपा कार्यकर्ताओं ने इन पोस्टर्स पर नाराजगी जताई है और आरोप लगाया है कि राजनीतिक लाभ के लिए पुराने मुद्दों को फिर से हवा दी जा रही है।
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