
आशूरा के मौके पर बुरहानपुर में शिया मुस्लिम समाज ने हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास इब्ने अली की शहादत की याद में पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला। पूरे शहर में “या हुसैन” और “या अब्बास” की सदाएं गूंजती रहीं, जबकि बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
जुलूस सिंधीपुरा स्थित इमाम बारगाह से शुरू होकर शहर के विभिन्न अशूरखानों और निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए पुनः अशूर खाना (भाई साहब) पहुंचकर संपन्न हुआ। इस दौरान समाज के लोग, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए।
मातमी जुलूस के दौरान वक्ताओं ने कर्बला की घटना और हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी का संदेश साझा करते हुए कहा कि उनकी शहादत अन्याय, अत्याचार और असत्य के खिलाफ संघर्ष तथा इंसानियत, न्याय और भाईचारे का प्रतीक है। यह संदेश आज भी समाज को सत्य और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
जुलूस की व्यवस्थाओं का संचालन समाज के वरिष्ठ सदस्यों और युवाओं ने किया। आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और पुलिस बल पूरे मार्ग पर तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
आशूरा के अवसर पर निकले इस मातमी जुलूस ने बुरहानपुर की गंगा-जमुनी तहजीब, धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द की एक बार फिर मिसाल पेश की।








