बुरहानपुर: ग्राम सभा गायब, जिम्मेदार नदारद मांजरोदकला में घंटों इंतजार करते रहे ग्रामीण, उठे कई सवाल

बुरहानपुर/राजवीर सिंह राठौड़ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में अनिवार्य रूप से ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन खकनार विकासखंड की ग्राम पंचायत मांजरोदकला में इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। ग्राम सभा के लिए पहुंचे ग्रामीणों को घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन न तो पंचायत सचिव पहुंचे और न ही शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी।
ग्राम पंचायत स्वयं पंचायत भवन के अभाव में सामुदायिक भवन से संचालित हो रही है। ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद थी कि ग्राम सभा के माध्यम से उनकी समस्याओं, विकास कार्यों और लंबित मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन ग्राम सभा का आयोजन ही नहीं हो सका।

समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीण, नहीं मिला कोई जिम्मेदार

सुबह से ही गांव के कई लोग अपनी समस्याओं को लेकर निर्धारित स्थल पर पहुंच गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे रुकी हुई मजदूरी, अधूरे विकास कार्यों और पंचायत योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे। लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता का अभाव है और उन्हें विकास कार्यों, बजट आवंटन तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं दी जाती।

सालभर से रुकी मजदूरी को लेकर भी नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि कई मजदूरों को लंबे समय से मजदूरी भुगतान का इंतजार है। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्राम सभा को अपनी बात रखने का मंच मानकर पहुंचे लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार ग्राम सभा नहीं होने से ग्रामीणों की समस्याओं पर चर्चा का अवसर भी समाप्त हो गया और जवाबदेही तय नहीं हो सकी।

शासन के आदेशों की अनदेखी पर उठे सवाल

प्रदेश सरकार द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद ग्राम सभा का आयोजन नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर संकेत करता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि शासन के निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं होगा, तो ग्रामीण विकास और जनभागीदारी की पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी।

मांजरोदकला में ग्राम सभा का आयोजन न होना केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं और अधिकारों की अनदेखी का मामला भी माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि शासन के आदेशों को नजरअंदाज करने वाले जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी और लंबे समय से अपनी मजदूरी तथा अन्य समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी।

यह भी पढ़े: सागर: औद्योगिक भूमि आवंटन के विरोध में उतरे गढ़ौली कला और कुड़ई के ग्रामीण, विधायक प्रदीप लारिया को सौंपा ज्ञापन

 

  • Burhanpur Village council absent responsible people absent villagers wait for hours in Manjarodkala raising many questions
Srota Swati Tripathy

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