
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश के करीब 8 करोड़ सक्रिय सदस्यों को प्रभावित करने वाले बड़े बदलावों की घोषणा की है। नए नियमों के तहत अब ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा का 12% यानी ₹1,800 प्रति माह तक का कर्मचारी PF योगदान अनिवार्य रहेगा। इससे अधिक राशि का योगदान अब स्वैच्छिक (Voluntary) माना जाएगा।
इसके साथ ही EPFO ने PF निकासी प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है। पहले जहां अलग-अलग उद्देश्यों के लिए 13 प्रकार की निकासी श्रेणियां थीं, अब उन्हें घटाकर केवल तीन प्रमुख कैटेगरी में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य दावा प्रक्रिया को सरल बनाना और सदस्यों को तेजी से भुगतान उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत आवश्यक जरूरतें (जैसे इलाज, शिक्षा और विवाह), आवास संबंधी जरूरतें तथा विशेष परिस्थितियों को तीन प्रमुख निकासी श्रेणियों में रखा गया है। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग नियमों और दस्तावेजों की जटिलता से राहत मिलने की उम्मीद है।
EPFO का कहना है कि इन बदलावों का मकसद कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को सुरक्षित रखते हुए निकासी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। स्वैच्छिक योगदान करने वाले कर्मचारी चाहें तो ₹1,800 से अधिक भी PF में जमा कर सकते हैं, लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से क्लेम निपटान की प्रक्रिया तेज होगी, भ्रम कम होगा और करोड़ों कर्मचारियों को अपने PF खाते के संचालन में अधिक आसानी मिलेगी। हालांकि, अधिक PF योगदान करने वाले कर्मचारियों को अब यह तय करना होगा कि वे अतिरिक्त राशि स्वैच्छिक रूप से जमा करना चाहते हैं या नहीं।
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