
: मध्य प्रदेश ने कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। पहली बार देश के किसी एक राज्य की 12 उद्यानिकी फसलों को एक साथ भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला है। इस उपलब्धि से प्रदेश के किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, कानूनी संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
GI टैग पाने वाले प्रमुख उत्पादों में गुना का कुम्भराज धनिया, खरगोन की लाल मिर्च, नरसिंहपुर का बरमान घाट बैंगन, बैतूल का गजरिया आम, आलीराजपुर का नूरजहां आम, मांडू की खुरासानी इमली, जबलपुर की हरी मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू, मालवी गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़ और जबलपुर का सिंघाड़ा शामिल हैं। इन उत्पादों की विशेष गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान को अब कानूनी संरक्षण मिलेगा।
विशेष रूप से गुना का कुम्भराज धनिया अपनी तेज सुगंध, मीठे स्वाद और बेहतर गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। वहीं खरगोन की लाल मिर्च देश-विदेश के बाजारों में पहले से ही लोकप्रिय है और चीन, मलेशिया, सऊदी अरब सहित कई देशों में इसका निर्यात होता है। GI टैग मिलने से इन उत्पादों की वैश्विक मांग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि GI टैग मिलने से किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने की अपील की है। सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा 28 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य भी तय किया है।
सरकार ने इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल-पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी सहित कई अन्य पारंपरिक उत्पादों के लिए भी GI टैग का प्रस्ताव भेजा है। यदि इन्हें भी मंजूरी मिलती है, तो मध्य प्रदेश की कृषि और खाद्य उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी
- mp-12-crops-gi-tag-guna-coriander-khargone-red-chilli








