
सागर: जिले के केसली जनपद पंचायत क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों से उद्यमियों शॉपिंग कॉम्प्लेक्स दुकान आवंटन विवाद को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन ने सक्रिय पहल शुरू कर दी है। लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे दुकानदारों की समस्याओं को सुनने के लिए बुधवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी ने केसली तहसील परिसर में विशेष शिविर आयोजित किए। शिविरों में बड़ी संख्या में प्रभावित दुकानदार पहुंचे और अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं।
बैठक के दौरान वर्षों से चली आ रही नाराजगी और असंतोष खुलकर सामने आया। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि पूर्व में की गई दुकान आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया। कई लोगों का कहना था कि कुछ व्यक्तियों को दो से तीन दुकानें तक आवंटित कर दी गईं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोग राशि जमा कराने के बावजूद आज तक दुकान मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ मामलों में कागजों पर दुकान किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है, जबकि वास्तविक कब्जा किसी और के पास है।
दुकानदारों ने यह भी बताया कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण आज तक पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया है। परिसर में अधूरे निर्माण कार्य, बुनियादी सुविधाओं की कमी और गंदगी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। कई लोगों का कहना था कि पांच वर्षों के इंतजार और अनिश्चितता के बाद अब उनका प्रशासनिक प्रक्रिया से भरोसा उठ चुका है और वे अपनी जमा की गई राशि वापस चाहते हैं।
जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत केसली द्वारा 135 दुकानों के निर्माण की योजना बनाई गई थी। रोजगार और व्यवस्थित व्यापारिक सुविधा का सपना दिखाकर स्थानीय व्यापारियों की पुरानी दुकानों को हटाया गया था। इसके बाद लगभग 106 लोगों ने अपनी जमा पूंजी जनपद पंचायत के खाते में जमा कराई। दुकानदारों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में उनसे मनमाने तरीके से राशि वसूली गई, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें दुकानें नहीं मिल सकीं। कई लोगों ने बैंक या निजी कर्ज लेकर रकम जमा की थी, जिससे वे आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी ने शिकायतों और मांगों के आधार पर प्रभावित लोगों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया। पहली श्रेणी में वे लोग शामिल किए गए जो अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कराकर दुकान प्राप्त करना चाहते हैं। दूसरी श्रेणी में वे लोग हैं जो अब दुकान लेने के इच्छुक नहीं हैं और अपनी जमा राशि वापस चाहते हैं। तीसरी श्रेणी में वे जरूरतमंद हितग्राही रखे गए हैं जो व्यवस्थित और पूरी तरह तैयार दुकान का आवंटन चाहते हैं।
सीईओ विवेक केवी ने उपस्थित लोगों को भरोसा दिलाया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने दुकानदारों से एक माह का समय मांगा और आश्वासन दिया कि इस अवधि में निर्माण, आवंटन और वित्तीय मामलों से जुड़ी सभी प्रशासनिक एवं तकनीकी अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुकानों को पूरी तरह व्यवस्थित और उपयोग योग्य बनाया जाएगा ताकि आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी की जा सके। साथ ही राशि वापस चाहने वाले लोगों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
शिविर के बाद जिला पंचायत सीईओ ने स्वयं विवादित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परिसर में फैली गंदगी और अधूरी व्यवस्थाओं को देखकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल साफ-सफाई और आवश्यक सुधार कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएगा और लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान निकालने का हर संभव प्रयास करेगा।
इस दौरान केसली की एसडीएम राजनंदिनी शर्मा, जनपद पंचायत सीईओ प्रतिष्ठा जैन सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। जिला प्रशासन की इस पहल के बाद पांच सालों से परेशान दुकानदारों और हितग्राहियों में एक बार फिर न्याय और समाधान की उम्मीद जगी है।
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