हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन ने तैनात किया अपना घातक विध्वंसक HMS Dragon, फ्रांस के साथ मिलकर बनाई ‘स्पेशल फोर्स’

लंदन/दुबई। ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध के बीच वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए ब्रिटेन ने बड़ी सैन्य हलचल शुरू कर दी है। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को पुष्टि की कि रॉयल नेवी के ‘टाइप 45’ एयर डिफेंस डिस्ट्रॉयर HMS Dragon को पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में फिर से तैनात किया जा रहा है। यह युद्धपोत अब ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व वाले उस बहुराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा होगा, जिसका उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री गलियारे में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है।

HMS Dragon की नई भूमिका

मार्च में ईरान युद्ध छिड़ने के बाद से HMS Dragon पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात था, जहाँ वह साइप्रस की सुरक्षा में मदद कर रहा था। अब इसे हॉर्मुज की ओर भेजा गया है। ब्रिटिश प्रवक्ता के अनुसार, यह कदम ‘विवेकपूर्ण योजना’ का हिस्सा है ताकि स्थिति स्थिर होते ही अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों को तुरंत बहाल किया जा सके।

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ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीति की दौड़

 ईरान और अमेरिका के बीच 10 सप्ताह से चल रहे भीषण संघर्ष के बाद अब युद्ध विराम (Ceasefire) की कोशिशें तेज हो गई हैं। ब्रिटेन और फ्रांस इस योजना पर काम कर रहे हैं कि एक बार युद्ध रुकने के बाद हॉर्मुज के रास्ते सुरक्षित पारगमन कैसे सुनिश्चित किया जाए। इस मिशन में दुनिया के एक दर्जन देशों ने शामिल होने की इच्छा जताई है।

ईरान ने कहा सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई पूर्ण स्वस्थ

युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने पर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, शुक्रवार को ईरान के एक शीर्ष अधिकारी मजहर हुसैनी ने दावा किया कि खामेनेई “पूर्ण स्वस्थ” हैं। उन्होंने बताया कि युद्ध की शुरुआत में उन्हें घुटने और पीठ में चोटें आई थीं, जो अब काफी हद तक ठीक हो गई हैं। जल्द ही वे जनता के सामने आ सकते हैं।

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि वे अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता कराने के लिए दिन-रात संपर्क में हैं। दूसरी ओर, रूस और सऊदी अरब ने भी एक ‘दीर्घकालिक समझौते’ के लिए राजनयिक प्रयासों का आह्वान किया है। मिस्र और कतर के विदेश मंत्रियों ने भी फोन पर चर्चा कर स्पष्ट किया कि कूटनीति ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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