
गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने शिक्षामित्रों को नियमों के विपरीत सहायक शिक्षक बनाने का प्रयास किया, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे करीब डेढ़ लाख परिवारों पर संकट खड़ा हो गया था, लेकिन सरकार ने इन्हें सड़क पर आने से बचाया और सहयोग का रास्ता चुना।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो अप्रैल से लागू भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा संवाद और सहयोग के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया है, न कि टकराव से।
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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सभी शिक्षामित्रों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर भी दिया जाएगा। इसके साथ ही जिनके खाते नहीं खुले हैं, उनके बैंक खाते खुलवाने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि मानदेय सीधे खातों में पहुंचे।
योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे नकारात्मक सोच से दूर रहकर बच्चों के भविष्य निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि “पहले देश, फिर हम” की भावना के साथ कार्य करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं 30-36 प्रतिशत से बढ़कर 96-99 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं। ड्रॉपआउट दर भी 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, किताबें, जूते और स्वेटर उपलब्ध करा रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘अरुणोदय’ प्रार्थना सभा कैलेंडर का विमोचन भी किया और बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न जिलों से आए शिक्षामित्रों को सम्मानित भी किया और बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरित किए।
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