
दमोह: जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के सामने मरीजों ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। अव्यवस्थाएं सामने आने पर कलेक्टर ने सिविल सर्जन को जमकर फटकार लगाई और अनुपस्थित कर्मचारियों के वेतन काटने के निर्देश दिए।
बुधवार सुबह बिना पूर्व सूचना के कलेक्टर प्रताप नारायण यादव जिला अस्पताल पहुंचे, जिससे अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान ओपीडी में डॉक्टरों की कम उपस्थिति, कई कर्मचारियों की अनुपस्थिति और मरीजों को हो रही परेशानियां सामने आईं। मरीजों ने कलेक्टर के सामने ही इलाज में लापरवाही और सुविधाओं की कमी की शिकायत की।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने अस्पताल के मुख्य गेट पर स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत अंदर ले जाया जा सके।
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अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि उन्हें पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिला है। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और भोपाल में हेल्थ कमिश्नर से फोन पर बात कर बकाया भुगतान जल्द कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों ने सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने की शिकायत की। जबकि अस्पताल में मशीन उपलब्ध है, इसके बावजूद मरीजों को बाहर निजी केंद्रों पर खर्च करना पड़ रहा है। इस पर कलेक्टर ने तुरंत निर्देश दिए कि विशेषज्ञ बुलाकर सोनोग्राफी सेवा चालू कराई जाए, ताकि मरीजों को सुविधा मिल सके।
कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी ऐसी लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अनुपस्थित कर्मचारियों की उपस्थिति रिपोर्ट मंगाकर उनके वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सागर की जॉइंट डायरेक्टर को भी अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
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