
एंटरटेनमेंट डेस्क: अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्होंने Windows 98 पर कीबोर्ड तोड़ते हुए गेम्स खेले हैं, तो ‘मॉर्टल कॉम्बैट II’ आपको बचपन की गलियों में ले जाएगी। हॉलीवुड ने एक बार फिर गेम के किरदारों को पर्दे पर उतारने का जोखिम उठाया है, और इस बार मुकाबला सीधा ‘डू और डाई’ वाला है।
एक्शन ऐसा कि रोंगटे खड़े हो जाएं!
फिल्म में एक्शन की ऐसी ‘मिर्ची’ है जिसे कमजोर दिल वाले बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। अगर आप ‘फैटालिटी’ और रूह कंपा देने वाले खून-खराबे के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए किसी दावत से कम नहीं है। कार्ल अर्बन ने ‘जॉनी केज’ बनकर पर्दे पर जो आग लगाई है, और एडलाइन रुडोल्फ ने ‘प्रिंस किटाना’ के किरदार में जो तेवर दिखाए हैं, वह काबिले तारीफ हैं। फिल्म का सेट डिजाइन और स्टंट कोरियोग्राफी देखकर आप भी स्टंट डायरेक्टर को ‘हाई-फाइव’ देने पर मजबूर हो जाएंगे।
रफ्तार ने बिगाड़ा जायका!
लेकिन साहब, सिर्फ मसालों से बात नहीं बनती, पकवान को पकने के लिए वक्त भी चाहिए होता है। फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि आपको सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिलती। एक लड़ाई खत्म नहीं होती कि दूसरी शुरू! एडिटर ने कैंची ऐसी चलाई है कि कहानी के तार कहीं-कहीं उलझ गए हैं। ऐसा लगता है मानो वार्नर ब्रदर्स ने फिल्म को जरूरत से ज्यादा ‘ट्रिम’ कर दिया हो। संगीत की धुनें शानदार हैं, पर वो भी बीच-बीच में अचानक कट जाती हैं, जो किसी जुर्म से कम नहीं लगता।
फिल्म देखें या न देखें?
अगर आप ‘मॉर्टल कॉम्बैट’ के सच्चे दीवाने हैं और अपने पसंदीदा जांबाजों को खूंखार अंदाज में लड़ते देखना चाहते हैं, तो सिनेमाघर जरूर जाइए। यह फिल्म किसी रोलर-कोस्टर राइड जैसी है—तेज, खतरनाक और थोड़ी उलझी हुई। आम दर्शकों के लिए शायद यह सिर्फ ‘मार-धाड़’ वाली फिल्म हो, पर एक गेमर के लिए यह पुरानी यादों का जश्न है।
ब्रांणवाणी का फाइनल फैसला : 3/5 स्टार (कलेजा मजबूत हो तो ही जाएं!)
कलाकार: कार्ल अर्बन, एडेलिन रूडोल्फ, मार्टिन फोर्ड, लुडी लिन, जेसिका मैकनेमी, जो तस्लीम, हिरोयुकी सानाडा, ताती गेब्रियल, जोश लॉसन, तादानोबु असानो
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