
सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र से सोमवार को एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया, जहां उल्दन बांध परियोजना से प्रभावित तीन किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर गांव के एक मोबाइल टावर पर चढ़ गए। दोपहर की भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच किसानों द्वारा उठाए गए इस कदम से प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही तहसीलदार, पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए गए।
जानकारी के अनुसार बंडा बृहद परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे उल्दन बांध में आगामी मानसून के दौरान पानी भराव की तैयारी की जा रही है। इसके चलते डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों को खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी दौरान ग्राम किरौला के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन बिना उचित मुआवजा दिए गांव खाली कराने का दबाव बना रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई किसानों को अब तक उनकी जमीन और मकानों का मुआवजा नहीं मिला है, जबकि प्रशासन लगातार क्षेत्र खाली करने के निर्देश दे रहा है।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे तीन किसान सोमवार दोपहर करीब 1 बजे गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गए। किसानों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें बेघर करने पर तुला हुआ है, लेकिन उनकी जमीन और संपत्ति का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा। किसानों ने कहा कि कई बार आवेदन और शिकायत करने के बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
घटना के दौरान क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। तेज गर्मी में लोहे के टावर पर चढ़े किसानों की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों की बड़ी भीड़ मौके पर जमा हो गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने तत्काल मोर्चा संभाला। तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए किसानों से बातचीत की और उन्हें सुरक्षित नीचे उतरने की अपील की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मुआवजा संबंधी प्रकरणों की जल्द समीक्षा कर समाधान निकाला जाएगा। हालांकि काफी देर तक समझाइश के बाद भी किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे।
इस घटनाक्रम के बाद बंडा क्षेत्र और आसपास के गांवों में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि डूब प्रभावित किसानों को समय पर उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पहले किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, उसके बाद ही गांव खाली कराने की कार्रवाई की जाए।
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसानों से लगातार संवाद किया जा रहा है और उन्हें सुरक्षित नीचे लाने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मुआवजा वितरण में यदि किसी प्रकार की विसंगति है तो उसकी दोबारा जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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