
चचाई के विवेक नगर और केल्हौरी क्षेत्र में आबकारी नियमों की धज्जियां: ठेकेदार की शह पर अवैध शराब का काला कारोबार और गोलमाल के गंभीर आरोप
काली मंदिर और केल्हौरी इलाके में महिलाओं के जरिए संचालित हो रही अवैध शराब पैकारी, पुलिस कार्रवाई में जब्ती के आंकड़ों पर उठ रहे बड़े सवाल।
*रिपोर्टर :- *जियाउद्दीन अंसारी*
संभागीय ब्यूरो चीफ शहडोल(म. प्र.)
जन सरोवर प्राइम पत्रिका*
*अनूपपुर* जिले के चचाई थाना अंतर्गत अवैध शराब के कारोबार का साम्राज्य इन दिनों चरम पर है, जहां कानून के रखवालों की नाक के नीचे खुलेआम ‘पैकारी’ का धंधा फल-फूल रहा है। चचाई के काली मंदिर के पास, मेडियारास, और विवेक नगर से लेकर केल्हारी तक एक सोची-समझी साजिश के तहत महिलाओं के माध्यम से अवैध शराब का वितरण और विक्रय कराया जा रहा है, जिसे स्थानीय शराब ठेकेदार और उसके नुमाइंडों का सीधा संरक्षण प्राप्त है।
स्थिति तब और अधिक गंभीर और भ्रष्टाचार की बू से भर जाती है जब सूत्रों के हवाले से यह सनसनीखेज खुलासा होता है कि मौके पर दबिश के दौरान पकड़ी गई शराब की मात्रा और थाने में दर्ज कराई गई जब्ती सूची में जमीन-आसमान का अंतर है। जब शुरुआती गुप्त सूचनाओं के अनुसार मौके पर 20 पेटी अवैध शराब की मौजूदगी की बात सामने आ रही थी, तो महज कुछ ही पेटियों को थाने लाकर खानापूर्ति क्यों की गई? आखिर किसकी शह और किस साठगांठ के चलते 15 पेटी शराब रास्ते में या मौके से गायब कर दी गई, यह एक गंभीर जांच का विषय है
प्राप्त दस्तावेजों और प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार, थाना चचाई के अंतर्गत पुलिस ने यातायात थाना अनूपपुर के पास अमलाई चचाई रोड, रेस्क्यू तिराहा, विवेक नगर क्षेत्र में एक संदिग्ध चार पहिया वाहन (वैगनार कार क्रमांक MP-20-CB-4425) को पकड़ा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इस वाहन से 43.2 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब (कीमत 32,160 रुपये) जब्त की गई और आरोपी गौरव खयानी पिता मनोहर खयानी, निवासी बुढार हाल चचाई के खिलाफ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। लेकिन कागजों में दर्ज यह आंकड़ा उन वास्तविक जमीनी सच्चाइयों और सूत्रों के दावों से कोसों दूर है जो इस पूरे खेल को उजागर करते हैं।
स्थानीय नागरिकों और खुफिया सूत्रों का कहना है कि चचाई क्षेत्र के केल्हारी, विवेक नगर और मेडियारास जैसे संवेदनशील इलाकों में शराब ठेकेदार के इशारे पर महिलाओं को आगे कर अवैध पैकारी का नेटवर्क चलाया जा रहा है। ठेकेदार के कारिंदे खुद इन अड्डों पर माल पहुंचाते हैं ताकि एक्साइज विभाग और पुलिस की सीधी कार्रवाई से बचा जा सके। जब कभी मुखबिर की सटीक सूचना पर कोई बड़ी खेप पकड़ी जाती है, तो ठेकेदार के रसूखदार नुमाइंदे और भ्रष्ट तंत्र के बीच सौदेबाजी होती है, जिसके फलस्वरूप बड़ी मात्रा में शराब को गायब कर केवल कागजी खानापूर्ति कर दी जाती है।
चचाई के काली मंदिर के पास और मेडियारास इलाके में महिलाओं के जरिए हो रहे इस अवैध कारोबार की गूंज अब आम नागरिकों की जुबान पर है। महिलाओं को मोहरा बनाकर अवैध शराब बेचने का यह धंधा इसलिए भी फल-फूल रहा है क्योंकि पुलिस आम तौर पर महिलाओं पर सीधे हाथ डालने से बचती है, और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर शराब माफिया अपने अवैध साम्राज्य का विस्तार कर रहे हैं। इस पूरे नेक्सस में स्थानीय स्तर पर पदस्थ कुछेक दलालों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है जो ठेकेदार और प्रशासनिक अमले के बीच की कड़ी का काम करते हैं।
सूत्रों का यह दावा बेहद चौंकाने वाला है कि घटना के वक्त कुल 20 पेटी शराब की खेप मौजूद थी, जिसे सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाया गया। यदि मौके पर सचमुच इतनी बड़ी खेप थी और उसमें से 15 पेटी गायब कर दी गईं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। क्या पुलिस ने जानबूझकर जब्ती के आंकड़ों को कम दिखाया ताकि मुख्य सरगना और ठेकेदार को बचाया जा सके? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
केल्हारी और विवेक नगर क्षेत्र में आबकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वैध दुकानों की आड़ में अवैध रूप से गांवों और बस्तियों में घर-घर शराब पहुंचाई जा रही है, जिससे युवा पीढ़ी नशे की गर्त में धकेली जा रही है। कानून की सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि मैदानी हकीकत यह है कि शराब ठेकेदार के सिंडिकेट ने पुलिस थाने के करीब ही अवैध पैकारी के मिनी गोदाम खड़े कर रखे हैं, जिन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
दस्तावेजों के अवलोकन से यह भी स्पष्ट होता है कि जिस वाहन (MP-20-CB-4425) से जब्ती दर्शाई गई है, उसमें इतनी कम मात्रा मिलना और सूत्रों द्वारा बताए गए 20 पेटी के आंकड़ों में भारी अंतर इस बात का स्पष्ट संकेत है कि या तो पुलिस ने पकड़े गए माल को छिपाया है या फिर कार्रवाई के नाम पर लीपापोती की गई है। इस तरह के मामलों में आबकारी विभाग की चुप्पी भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जो लाइसेंसधारी ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाने में पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं।
चचाई, मेडियारास,और विवेक नगर के निवासियों ने इस अवैध कारोबार के खिलाफ कई बार दबी जुबान में आवाज उठाई है, लेकिन शराब सिंडिकेट के रसूख के आगे किसी की नहीं चलती। महिलाओं के कंधों पर बंदूक रखकर यह अवैध व्यापार चलाने वाले मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे सुरक्षित बैठे हैं, जबकि छोटे-मोटे वाहन चालकों या मोहरों को कानूनी फंदे में फंसाकर मामले को दबाने का प्रयास किया जाता है।
अतः अब यह जरूरी हो गया है कि जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और आबकारी आयुक्त इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए केवल छोटे मोहरों आरोपी गौरव खयानी या पैकारी करने वाली महिलाओं पर कार्रवाई करने तक सीमित न रहे, बल्कि इस अवैध सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड यानी शराब ठेकेदार और उन रसूखदारों के गिरेबान तक हाथ पहुंचाए जिनकी शह पर 20 पेटी शराब में से बड़ा हिस्सा गायब किया गया। यदि इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच नहीं कराई जाती है, तो चचाई क्षेत्र में अवैध शराब का यह काला कारोबार और अधिक बेखौफ होकर पनपेगा, जो क्षेत्रीय शांति और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा नासूर बन चुका है।
- चचाई के विवेक नगर और केल्हौरी क्षेत्र में आबकारी नियमों की धज्जियां: ठेकेदार की शह पर अवैध शराब का काला कारोबार और गोलमाल के गंभीर आरोप








