बड़वानी में खाद के लिए हाहाकार: 70 किमी दूर से भूखे-प्यासे पहुंच रहे किसान, सर्वर डाउन और टोकन सिस्टम ने बढ़ाई मुसीबत

बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में खरीफ सीजन की बुआई शुरू होते ही अन्नदाताओं को खाद के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। शासकीय दामों पर खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को चिलचिलाती धूप में भूखे-प्यासे कई-कई घंटों कतारों में बिताना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर तलून में स्थित सहकारी संस्था के नकदी खाद वितरण केंद्र पर प्रतिदिन सैकड़ों किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अपने नजदीकी क्षेत्रों में नकदी खाद केंद्र न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसान 50 से 70 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करके और भारी भाड़ा खर्च कर सुबह 7 बजे से ही इस केंद्र पर कतार लगा रहे हैं।

चिलचिलाती धूप में पीने के पानी और भोजन का संकट, आबादी से दूर है केंद्र

तलून स्थित नकदी खाद वितरण केंद्र आबादी क्षेत्र से काफी दूरी पर स्थित है। केंद्र पर पहुंचे किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा इस भीषण गर्मी में न तो छांव की कोई व्यवस्था की गई है और न ही शीतल पेयजल (ठंडे पानी) का कोई इंतजाम है। कड़कती धूप के बीच खुले आसमान के नीचे किसान 5 से 6 घंटे तक अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र के आसपास खाने-पीने की कोई दुकान या होटल भी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण यदि किसी को भोजन या पानी की आवश्यकता होती है, तो उसे मजबूरन तलून या बड़वानी शहर की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहकर किसान महज कुछ बोरी खाद के लिए दिनभर जद्दोजहद करने को विवश हैं।

जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया और सर्वर डाउन होने से बढ़ी परेशानी, लग रही दुगुनी मार

केली गांव (सिलावद क्षेत्र) से आए किसान स्लिप रावत सहित अन्य किसानों ने बताया कि पूर्व में किसानों को उनकी जमीन की पावती और सरकारी पहचान पत्र (आधार) के आधार पर सीधे खाद मिल जाती थी, लेकिन अब व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया गया है। खाद लेने के लिए किसानों को पहले ऑनलाइन सेंटर जाकर टोकन सिस्टम के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ती है। ऑनलाइन केंद्रों पर भी सर्वर डाउन होने की समस्या से जूझना पड़ता है।

किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऑनलाइन टोकन जेनरेट करने के नाम पर कहीं ₹50 तो कहीं ₹100 या उससे भी अधिक की अवैध वसूली की जा रही है, जिससे गरीब किसानों पर आर्थिक रूप से दुगुनी मार पड़ रही है। टोकन कटने के भी 4 से 5 दिन बाद कहीं जाकर खाद वितरण सूची में किसान का नाम आता है। नाम आने के बाद जब किसान केंद्र पहुंचता है, तब भी एक-एक किसान के दस्तावेज स्कैन करने, मशीन से बिल निकालने और मोबाइल पर ओटीपी (OTP) आने की तकनीकी प्रक्रिया में सर्वर धीमा होने के कारण 15 मिनट से अधिक का समय बर्बाद हो रहा है।

20 दिनों से डीएपी (DAP) खाद गायब, फसलवार यूरिया देने की मांग

किसानों का कहना है कि वर्तमान में मक्का और ज्वार जैसी फसलें बोने वाले किसानों को यूरिया की सख्त आवश्यकता है, इसलिए सरकार को मांग के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद शासकीय दरों पर उपलब्ध करानी चाहिए क्योंकि खुले बाजार में निजी विक्रेता अत्यधिक महंगे दामों पर खाद बेच रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि इस परेशानी से निजात पाने के लिए प्रशासन को ग्राम पंचायत स्तर पर ही नकद खाद वितरण की स्थाई व्यवस्था शुरू करनी चाहिए।

पूरे मामले पर खाद केंद्र की क्षेत्र सहायक जागृति सांवले ने बताया कि केंद्र पर वर्तमान में अन्य सभी प्रकार की खाद तो उपलब्ध हैं, लेकिन डीएपी (DAP) खाद का स्टॉक पूरी तरह समाप्त है। डीएपी उपलब्ध न होने की लिखित सूचना उच्च स्तर के अधिकारियों को भेजी जा चुकी है, परंतु पिछले 15 से 20 दिनों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी केंद्र को डीएपी खाद की नई खेप प्राप्त नहीं हुई है। इसी वजह से किसानों को विकल्प के तौर पर अन्य मिश्रित खाद लेने की सलाह दी जा रही है। क्षेत्र सहायक ने स्वीकार किया कि प्रतिदिन 200 से अधिक किसान केंद्र पहुंच रहे हैं और ऑनलाइन दर्ज टोकन की संख्या के अनुसार ही खाद वितरित की जा रही है, लेकिन सर्वर और तकनीकी कमियों के कारण इस काम में समय लग रहा है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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