
छतरपुर। शहर के पुरानी स्टेट बैंक क्षेत्र में प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को जमकर विरोध देखने को मिला। प्रशासनिक टीम जब कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची, तो बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बढ़ते विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रशासन को कार्रवाई रोककर बुलडोजर वापस लौटाना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन गरीब और कमजोर परिवारों के मकानों को निशाना बना रहा है, जबकि शहर में ऐसे कई कथित भू-माफिया और प्रभावशाली लोग हैं जिन पर सरकारी जमीनों पर कब्जा करने तथा अवैध निर्माण करने के आरोप लगते रहे हैं। उनका कहना था कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है तो सबसे पहले ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
विरोध कर रहे हिंदू संगठनों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि जिन संपत्तियों को लेकर सिविल न्यायालय के आदेश मौजूद हैं और जिनकी भूमि वैधानिक रूप से घोषित की जा चुकी है, वहां भी तोड़फोड़ की कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी। इसे लेकर लोगों ने प्रशासनिक निर्णयों पर आपत्ति जताई और न्यायिक आदेशों के सम्मान की मांग की।
विरोध के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन बढ़ते विरोध को देखते हुए कार्रवाई स्थगित कर दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और बिना भेदभाव के होनी चाहिए। उनका मानना है कि एकतरफा कार्रवाई से जनता में असंतोष बढ़ता है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छतरपुर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं प्रशासन पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्टता और निष्पक्षता बनाए रखने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।








