
प्रदेश के राजस्व प्रशासन में उस समय हलचल तेज हो गई जब एक संभागीय कमिश्नर ने एक साथ 24 तहसीलदारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई तहसील स्तर पर कामकाज की समीक्षा और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। कमिश्नर के इस कदम के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों में चर्चा का माहौल है और इसे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कमिश्नर ने पहले भी कई बैठकों और निरीक्षणों के दौरान राजस्व मामलों के तेजी से निराकरण, लंबित प्रकरणों को कम करने और आम जनता से जुड़े कामों में गति लाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखने पर तहसीलदारों से जवाब मांगा गया। सूत्रों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार के लिए चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन स्थिति में पर्याप्त बदलाव नहीं होने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
मामला उस समय और चर्चा में आया जब नोटिस जारी होने के बाद संबंधित अधिकारियों में चिंता बढ़ गई। बताया जा रहा है कि कमिश्नर ने राजस्व प्रकरणों, शिकायतों और विभागीय कामकाज की समीक्षा के आधार पर यह कार्रवाई की है। हालांकि, अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है और अंतिम निर्णय जवाब एवं जांच के आधार पर ही लिया जाएगा। प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नोटिस को सुधारात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में यह संदेश गया है कि लंबित मामलों और कामकाज में लापरवाही को लेकर अब वरिष्ठ अधिकारी सख्त रुख अपना रहे हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि तहसील स्तर पर व्यवस्था मजबूत होने से आम लोगों को सीधे लाभ मिलता है, क्योंकि जमीन, नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व मामलों का सीधा संबंध जनता से होता है। अब देखना होगा कि नोटिस के जवाब के बाद कमिश्नर स्तर पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
- commissioner-action-notice-to-24-tehsildars-revenue-department-administrative-crackdown







