
भोपाल/आदित्य शंकर तिवारी: मध्य प्रदेश की पुराणिक और बहुचर्चित नगरी धार की भोजशाला सोमवार को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी। एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।
दोपहर करीब 1:30 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाग्देवी के भोजशाला परिसर में पहुंचे, जहां उन्होंने मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) के दर्शन कर पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।
मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भोजशाला का दौरा करने वाले डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उनके इस दौरे को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण और एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर धार शहर में सुबह से ही अपूर्व उत्साह और उत्सवी का माहौल देखा गया। सीएम डॉ. मोहन यादव के स्वागत के लिए शहर के विभिन्न चौराहों और प्रमुख मार्गों पर भव्य स्वागत मंच तैयार किए गए थे।
मई महीने की भीषण और तपती गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और भाजपा समर्थक मुख्यमंत्री की एक झलक पाने और उनका अभिनंदन करने के लिए सड़कों के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े नजर आए। जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला धार की सीमाओं में दाखिल हुआ, पूरा शहर “जय मां सरस्वती” और जयकारों के उद्घोष से गूंज उठा।
भोजशाला परिसर को इस खास मौके के लिए विशेष रूप से सजाया-संवारा गया था। मुख्यमंत्री की अगवानी के लिए परिसर में रेड कारपेट बिछाया गया था, जहां हिंदू संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पारंपरिक और आत्मीय तरीके से उनका स्वागत किया।
इस परिसर के भीतर प्रवेश करने के बाद मुख्यमंत्री सीधे गर्भगृह की ओर बढ़े और मां वाग्देवी के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर नमन किया। इसके उपरांत, डॉ. मोहन यादव परिसर में स्थित प्राचीन हवन कुंड तक पहुंचे और वहां मौजूद आचार्यों व पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्ण विधि-विधान से यज्ञ में आहुति देकर प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति की कामना की।
सीएम मोहन यादव ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की उन्नति और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की। उनके दौरे को लेकर सुबह से ही परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया।
भोजशाला को मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मुख्यमंत्री के इस दौरे को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूजा के बाद प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए राज्य के विकास और कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री का यह दौरा कानूनी और राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम है। बता दें कि 15 मई 2026 को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया था कि हिंदू पक्ष को वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए। इस न्यायिक निर्णय के तुरंत बाद सूबे के मुखिया का यहाँ आना कई बड़े संकेत देता है।
इस मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने इसे वर्षों के इंतजार के बाद आया एक बेहद भावुक और विशेष अवसर बताया। जनता के बीच यह भरोसा भी मजबूत होता दिखा कि राज्य सरकार की इस गंभीर पहल से अब लंदन में रखी माँ वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने का रास्ता भी साफ हो सकता है।
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