
आईजी की गैरमौजूदगी में डीआईजी संभाल रहे रेंज की जिम्मेदारी
रेंज कार्यालय में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था एक अलग ढंग से संचालित होती दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, रेंज के आईजी लंबे समय से नियमित कार्यालय गतिविधियों से दूर हैं और उनकी सार्वजनिक मौजूदगी भी सीमित हो गई है। ऐसे में विभागीय कामकाज को प्रभावित होने से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां डीआईजी स्तर पर निभाई जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आम प्रशासनिक प्रक्रियाएं और कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसले समय पर लिए जा सकें।
सूत्रों के मुताबिक, आईजी की अनुपस्थिति के दौरान कार्यालयी बैठकों से लेकर विभिन्न प्रशासनिक अनुमोदनों तक का कार्यभार डीआईजी के पास पहुंच गया है। रेंज से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि वर्तमान परिस्थितियों में नेतृत्व की भूमिका किस प्रकार संतुलित की जा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी तरह की असामान्य स्थिति स्वीकार नहीं की गई है और विभागीय कार्य नियमित रूप से जारी रहने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि फील्ड मॉनिटरिंग, अधीनस्थ इकाइयों के साथ समन्वय और कार्यालय संचालन से जुड़े कई अहम निर्णयों में भी डीआईजी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय संस्थागत कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है। इससे न केवल विभागीय कार्य प्रभावित होने से बचते हैं, बल्कि जनता से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी गति बनी रहती है।
विशेष बात यह है कि आईजी और डीआईजी दोनों ही भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। मौजूदा स्थिति में डीआईजी द्वारा अतिरिक्त जिम्मेदारियों का निर्वहन प्रशासनिक निरंतरता का उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, भविष्य में नियमित नेतृत्व व्यवस्था कब तक बहाल होगी, इसको लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल रेंज के संचालन की जिम्मेदारी व्यवहारिक रूप से डीआईजी के नेतृत्व में आगे बढ़ती नजर आ रही है।
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