
मुंबई/आदित्य शंकर तिवारी: अपनी अनूठी आवाज में हिंदी फिल्मी गानों को एक नई पहचान देने वालीं दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। आशा भोसले को शनिवार शाम को सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते हार्ट अटैक आया जिसके बाद उन्हें तुरंत मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी के मुताबिक आशा भोसले का मल्टी-ऑर्गन फेलियर यानी कई अंग फेल होने के कारण के कारण निधन हो गया।
8 सितंबर, 1935 को सांगली (महाराष्ट्र) में जन्मीं आशा को उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने उनकी बहन की तरह ही संगीत की शिक्षा दी। शायद संगीत उनके भाग्य में ही लिखा था। चार बहनों में से लता, उषा और आशा पार्श्व गायिकाएं थीं, जबकि मीना संगीतकार हैं। उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीतकार हैं। कई पुरस्कारों से सम्मानित आशा भोसले एक सफल उद्यमी भी थीं। उन्होंने दुबई और ब्रिटेन में कई वर्षो तक ‘आशा’ नाम से लोकप्रिय रेस्तरां भी चलाया।
उनकी आवाज में एक अलग ही चंचलता और आत्मा थी, जिसने कई दशकों तक अनेक पीढ़ियों को गुदगुदाया। उनकी आवाज जिसे सुनकर लोग सुबह उठते थे, रात को सोते थे। उन प्रेम भरी कहानियों में कही खो जाते थे जो कभी पूरी नहीं हो सकीं और हां, उस पर झूमते और रॉक एंड रोल करते थे।
उनका अंदाज कुछ ऐसा की – मुस्कुराता हुआ चेहरा, हमेशा साड़ी में, लाल बिंदी लगाए और करीने से जूड़े में बंधे बाल। 80 साल की उम्र में भी वे पूरे जोश और जज्बे के साथ “एक मैं और एक तू” पर नाचती हुई दिखाई देती थी।
16 वर्ष में घर से भागकर शादी की
16 साल की उम्र में आशा भोसले ने बड़ी बहन लता के 31 साल के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से भागकर शादी की थी। लता जी और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था। इसके कारण उन्होंने आशा से लंबे समय तक बातचीत बंद कर दी थी। शादी के बाद आशा भोसले को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह घरेलू हिंसा का शिकार भी हुईं। वह जिंदगी से इतनी निराश हो गई थीं कि खुद को खत्म करना चाहती थीं।
अपने पिता के निधन के बाद महज 10 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था. 1943 में फिल्म “माझा बल” के लिए मराठी गीत “चला चला नव बला” था। हिंदी फिल्म जगत में उनकी पहली प्रस्तुति 1948 में फिल्म “चुनरिया” के लिए “सावन आया” गीत से हुई। फिल्म उद्योग में उनके शुरुआती साल संघर्ष से भरे रहे, उन्हें कम दर्जे की फिल्मों में गाने के लिए मजबूर किया गया और पहले से ही मशहूर उनकी बहन के कारण वे हमेशा पीछे रह गईं।
वर्ष 1960 में आशा भोसले की पहली शादी टूट गई में वह अपने पहले पति से अलग हो गईं और वह अपने तीन बच्चों (हेमंत, वर्षा और आनंद) के साथ वापस अपने परिवार के पास आईं।
साउंड रिकॉर्डिस्ट ने आवाज को खराब बताया था
आशा भोसले ने 50 से 90 के दशक के बीच ओपी नैयर, आरडी बर्मन, खय्याम और बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। कई सदाबहार गाने गाए। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब इसी आवाज को खराब बताकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो से वापस भेज दिया गया था।
उन्होंने आरजे अनमोल के साथ बातचीत में आशा भोसले ने बताया था कि खराब आवाज बताकर उन्हें और किशोर कुमार को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से बाहर जाने के लिए कहा गया था। 1947 में वह किशोर कुमार के साथ जे.बी. रूंगटा के फेमस स्टूडियो में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म जान पहचान के लिए गाना रिकॉर्ड करने गई थीं। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे।
आशा ने बताया की आजकल स्टूडियो एयर-कंडीशन्ड होते हैं और उनमें ढेर सारी मशीनें होती हैं। उन दिनों दो ट्रैक वाली मशीनें होती थीं। एक ट्रैक संगीतकार और दूसरा गायक के लिए होता था। माइक भी एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था।
आशा भोसले और किशोर कुमार ने गाना शुरू किया। इसके बाद साउंड रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने बंगाली में कहा था कि आप लोगों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही है। किशोर कुमार समझ गए क्योंकि वह बंगाली जानते थे। उन्होंने आशा भोसले से कहा कि कुछ गड़बड़ है। आशा कुछ नहीं बोली। रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश से कहा कि आप दूसरे सिंगर लाओ। इनकी आवाज गाने के लायक ही नहीं है। इसके बाद दोनों स्टूडियो से चले गए थे।
उनकी आवाज और आवाज की विविधता बेहद अनूठी थी। एक ओर उन्होंने “आजा, आजा” पर श्रोताओं को बड़ी कुशलता से थिरकाया, तो दूसरी ओर उतनी ही कुशलता से “चैन से हम को कभी” में खोए हुए प्यार का मातम मनाया। उनका पहला गाना 1943 में 10 साल की उम्र में मराठी फिल्म “माझा बल” के लिए गया था, वे 2010 में ही वैश्विक संगीत इतिहास में सबसे लंबे समय तक गाने वाली गायिका बन गईं।
आशा भोसले अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के बिल्कुल विपरीत थी। उनकी आवाज स्थिर और मधुर 80 साल की उम्र तक बनी रही,.लता मंगेशकर का निधन फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में हुआ, ठीक आज आशा भोसले का भी 92 की उम्र में निधन हुआ।
भारत की दो ऐसी आवाजें जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप पर कई वर्षो तक राज किया। उन्होंने एक ऐसी सार्वभौमिक पहचान का प्रतिनिधित्व किया जिसकी कोई सीमा नहीं थी। जहां लता को पहले प्रसिद्धि मिली, वहीं जोशीली आशा ने भी उनका अनुसरण किया। उन्होंने न केवल शोहरत साझा की, बल्कि उसकी सीमाओं का विस्तार भी किया, उसे अपने जोश और अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा से अपना बना लिया।
जहां लता संगीत निर्देशक मदन मोहन, जो मधुर संगीत और गजलों के उस्ताद थे, की पहली पसंद थीं, वहीं आशा भी इस विधा में उतनी ही निपुण थीं. उन्हें आज भी फिल्म “उमराव जान” में गाई गई गजलों के लिए याद किया जाता है। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।
उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई अन्य संगीत सम्मानों से नवाजा गया। आशा भोसले के लोकप्रिय गीतों में ‘अभी न जाओ छोड़ कर’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दिल चीज क्या है’, संगीतकार आर. डी. बर्मन के साथ उनकी साझेदारी ने 1960 और 70 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत को नया रूप दिया. “पिया तू अब तो आजा”, “दम मारो दम”, “दुनिया में लोगों को’ और ‘जरा सा झूम लूं मैं’ जैसे गीतों ने उनकी अद्वितीय बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित किया।
उन्होंने पद्मिनी एवं वैजयंतीमाला जैसी दक्षिण भारतीय की अभिनेत्रियों से लेकर मीना कुमारी, मधुबाला, जीनत अमान, काजोल और उर्मिला मातोंडकर सहित कई प्रमुख अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी।
आशा भोसले के बेटे आनंद ने बताया कि अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ”लोग कल पूर्वाह्न 11 बजे लोअर परेल स्थित कासा ग्रांडे में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं, जहां वह रहती थीं। उनका अंतिम संस्कार कल शाम चार बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा।”आशा भोसले ने अपने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में 12,000 से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए। उन्होंने कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा।
सिनेमा से इस दुःखद खबर के पता चलते ही लोगो ने उन्हें अपने शब्दों में याद करते हुए श्रद्धांजलि दी –
राजनीतिक जगत: “सांस्कृतिक विरासत की क्षति”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ”आशा भोसले जी के निधन से संगीत जगत में खालीपन आ गया है। प्रख्यात गायिका के रूप में उनके शानदार करियर ने भारत में संगीत के एक युग को परिभाषित किया।” उनकी मधुर और सदबहार आवाज़ से उनका संगीत अमर रहेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा भोसले के निधन पर कहा की वे आज बेहद दुःखी है। आशा जी ‘भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक थी” उनके द्वारा दी गई भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करती रहेंगी, उनकी आवाज़ का जादू दशकों तक चला, उनकी आवाज में एक कालातीत चमक थी।
मोहन यादव: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- “वे एक अद्भुत गायिका थीं, जिनकी आवाज में जादू था। बच्चों के गीतों से लेकर शास्त्रीय संगीत तक, उन्होंने हर शैली में अपनी पहचान बनाई”। आशा जी के मध्य प्रदेश से जुड़ाव व दादा साहेब फाल्के जैसे सम्मानों को भी याद किया।
नितिन गडकरी: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा – आशा ताई और उनके बीच कई वर्षो के पारिवारिक संबंध थे। उन्होंने कई भाषाओं में अनेक गीत गाए, जो आज भी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। उन्होंने देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है।
देवेंद्र फडणवीस: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें याद करते हुए कहा – वह बहुमुखी कलाकारों में से एक थीं, जिन्होंने ने पूरे विश्व में भारतीय संगीत को पहुँचाने में और मंगेशकर परिवार के योगदान को अतुलनीय कहा।
खेल जगत: मैदान पर दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि
IPL 2026: मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच वानखेड़े स्टेडियम में मैच से पहले दो मिनट का मौन रखा। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने उनकी याद में काली पट्टी (ब्लैक आर्मबैंड) बांधी।
गौतम गंभीर: टीम इंडिया के हेड कोच ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि आशा जी की शालीनता और बेमिसाल प्रतिभा हमेशा हमारी यादों में जीवित रहेगी।
सचिन तेंदुलकर: क्रिकेटर मास्टर ब्लास्टर ने सोशल मिडिया पर लिखा “ऐसा लगता है, समय ही थम गया” वे अपने अमर गीतों के लिए हमेशा अमर हो गई
विराट कोहली: क्रिकेटर किंग कोहली ने कहा आपकी आवाज ने करोड़ों लोगों के दिलों को छुआ है और यह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।
अजिंक्य रहाणे: मुंबई के क्रिकेटर ने कहा “उनकी आवाज सिर्फ संगीत ही नहीं थी, बल्कि एक भावना थी” जो कालातीत और अविस्मरणीय है।
सिनेमा जगत: “एक युग की धड़कन रुक गई”
शाहरुख खान: उन्होंने कहा कि आशा ताई की आवाज भारतीय सिनेमा का मजबूत स्तंभ है। वह उन्हें बहुत मिस करेंगे और उनका आशीर्वाद हमेशा साथ रहेगा।
अनुपम खेर: “वह सिर्फ संगीत जगत का हिस्सा नहीं थीं, वह खुद एक युग थीं।” उन्होंने आशा जी के जज्बे और हर उम्र में खुद को नए रूप में ढालने की कला की सराहना की।
राम गोपाल वर्मा: उन्होंने ‘रंगीला’ और ‘कंपनी’ (खल्लास गाना) के दिनों को याद करते हुए कहा कि आशा जी की आवाज ने उनके सिनेमाई जादू में जान फूकी थी।
रमेश सिप्पी: उन्होंने आर.डी. बर्मन (पंचम) और आशा जी के साथ ‘शोले’ के समय की यादों को साझा करते हुए इसे बेहद भावुक पल बताया।
प्रसून जोशी: CBFC के अध्यक्ष ने कहा कि आशा जी जैसी प्रतिभा रोज जन्म नहीं लेती, उनके साथ काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी।
जैकी श्रॉफ: मशहूर अभिनेता ने भावुक होते हुए कहा कि ‘आई’ (आशा जी) उनके भीतर इतनी गहराई से बसी हैं कि वह उनके लिए हमेशा अमर रहेंगी।
कमल हासन: उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर “स्थायी गायिका सखी” कहकर उन्हें याद किया।
संगीत जगत: “संगीत की एक संस्था का अंत”
अनु मलिक: उन्होंने अत्यंत भावुक होकर कहा, “मेरी मां चली गईं। मेरी सफलता में उनका बहुत बड़ा हाथ था।”
के. हरिहरन: उन्होंने आशा जी को ‘भगवान की दी हुई अनमोल आवाज’ बताया और कहा कि वह परिवार के सदस्य जैसी थीं।
कैलाश खेर: उन्होंने कहा “उनके साथ किए गए वर्ल्ड टूर को याद करते हुए उनकी विनम्रता और मिलनसार स्वभाव” की तारीफ की।
हर्षदीप कौर: “द वॉइस ऑफ लव” अब हमारे बीच नहीं रही। उन्होंने उन्हें “संगीत की एक संस्था” बताया।
ललित पंडित: उन्होंने कहा कि “आखिरी दिग्गज चली गईं और अब उस स्तर का काम करने वाला कोई दूसरा सिंगर नहीं होगा।”
पलक मुछाल: उन्होंने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि आशा जी हर सुर में जीवित रहेंगी।
“हिंदी सिनेमा में सात दशकों तक सिनेमाई संगीत की धड़कन और करोड़ों दिलों की आवाज़ बनीं आशा ताई का जाना एक युग का अंत है” ब्रांडवाणी समाचार भारतीय फिल्म जगत की इस अनमोल धरोहर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
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