इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के बावजूद गिरफ्तारी पर जताई कड़ी नाराजगी, यूपी सरकार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में अंतरिम आदेश के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी और उसे अवैध हिरासत में रखने पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़ित को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने संबंधित व्यक्ति की तत्काल रिहाई के निर्देश देते हुए मामले में दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को भी कहा है।

यह मामला अनिल सोनी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ कर रही थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाना क्षेत्र में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के बावजूद हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल को उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बावजूद 4 अप्रैल को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और हिरासत में रखा।

याचिकाकर्ता के अनुसार गिरफ्तारी के समय उनके परिजनों और वकील ने थाना प्रभारी को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने आदेश को नजरअंदाज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। वहीं सरकारी पक्ष ने दलील दी कि संबंधित अंतरिम आदेश की प्रति पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई गई थी, इसलिए कार्रवाई की गई।

कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए कहा कि न्यायालय के अंतरिम आदेश की अवहेलना न केवल गंभीर लापरवाही है बल्कि यह न्यायिक आदेशों के प्रति असम्मान भी दर्शाता है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही, अनुशासनहीनता और कोर्ट के आदेश की अवहेलना के लिए विभागीय कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी स्थिति में न्यायालय के आदेश का पालन करना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है और आदेश की जानकारी न होना इस लापरवाही को सही नहीं ठहराता। इस मामले में सरकार को 5 लाख रुपये का मुआवजा पीड़ित को देने का आदेश दिया गया है और तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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