
रतलाम/सुखेड़ा: जावरा क्षेत्र में जैन समाज की प्रतिष्ठित संस्था नवरत्न परिवार सुखेड़ा द्वारा करुणा दिवस के अवसर पर आयंबिल तप का भव्य आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और धार्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। यह आयोजन प.पू. आगमोद्वारक सूरिजी के समुदायवर्ती प.पू. मनोहर-इन्दू-हेमप्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या प.पू. हेम प्रज्ञाश्रीजी म.सा. की निश्रा में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कुल 92 श्रद्धालुओं ने संयम, साधना और आत्मशुद्धि की भावना के साथ आयंबिल तप का लाभ लिया। पूरे आयोजन स्थल पर शांत, सात्विक और धर्ममय वातावरण बना रहा। जिला सचिव नवकार मेहता ने कहा कि आयंबिल केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि, संयम और मोक्ष साधना का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सेवा, संस्कार और तप की परंपरा को मजबूत करते हैं।
आयोजन की संपूर्ण व्यवस्थाएं नवकार मेहता, शुभम बोहरा, अक्षय शेखावत, हिमांशु जैन, मनन जैन, आशुल जैन, अभिषेक बोकड़िया, विकास जैन, अनिल राठौड़, सौरभ मेहता एवं जैन मंदिर के पुजारी पंडित विशालजी के नेतृत्व में सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुईं। इस अवसर पर श्री आदिनाथ जैन श्रीसंघ सुखेड़ा, नवरत्न परिवार सुखेड़ा एवं श्री आदिनाथ महिला मंडल सहित विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
जावरा से राजकुमार जी हरण, अशोक जी झामर, श्रीमती प्रमिला धारीवाल और श्रीमती सपना ढढ़ढ़ा का विशेष योगदान रहा। आयंबिल तप के दौरान श्रद्धालुओं ने बिना मसाले, बिना तेल-घी एवं स्वाद रहित भोजन के साथ संयमित दिनचर्या का पालन किया और प्रार्थना, ध्यान तथा स्वाध्याय के माध्यम से आत्मकल्याण की साधना की।
यह आयोजन जैन समाज की धार्मिक निष्ठा, सेवा भावना और तप परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
ये भी पढ़े – जावरा में मुस्लिम समाज ने गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, SDM को सौंपा ज्ञापन
- ratlam-sukheda-jain-aayambil-tap-karuna-diwas-religious-event-92-devotees








