
नई दिल्ली: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू जिला अदालत ने शनिवार को कथित तौर पर हरियाणा भूमि सौदे में अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में लोकसभा संसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को नियमित जमानत दे दी है। पीएमएलए PMLA मामलों के विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने वाड्रा को 50,000 रुपये के मुचलके (श्योरिटी बॉन्ड) पर यह जमानत मंजूर की। अदालत ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के दौरान वाड्रा को गिरफ्तार किए बिना ही अपनी अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) अदालत में दाखिल कर दी थी।
शनिवार को सुनवाई के दौरान ईडी (ED) की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने अदालत को सूचित किया कि एजेंसी वर्तमान में एक स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने आगे की जांच के बाद एक अतिरिक्त रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लाने के लिए अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा। इसके साथ ही उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। यह घटनाक्रम दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा वाड्रा की उस याचिका पर सुनवाई के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय में वाड्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जिन कथित मुख्य अपराधों (प्रेडिकेट ऑफेंस) का जिक्र किया जा रहा है, वे साल 2008 से 2012 के बीच के हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ईडी द्वारा शामिल की गई कुछ धाराएं बाद में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की अनुसूची में जोड़ी गई थीं। इस याचिका का विरोध करते हुए ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि यह याचिका कानून की त्रुटिपूर्ण व्याख्या पर आधारित है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति मनोज जैन ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मई की तारीख तय की है।
इससे पहले शनिवार को ही, रॉबर्ट वाड्रा समन के अनुपालन में राउज़ एवेन्यू कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। गौरतलब है कि पिछले महीने ट्रायल कोर्ट ने इस कथित भूमि सौदा मामले में वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ ईडी द्वारा दायर की गई चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। अदालत परिसर से बाहर निकलने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ईडी पूरी तरह से सरकार के इशारे पर काम कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
ईडी का यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला फरवरी 2008 के एक भूमि सौदे से जुड़ा है, जिसमें ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी शामिल थी। रॉबर्ट वाड्रा पूर्व में इस कंपनी के निदेशक रह चुके हैं। ईडी के आरोपों के मुताबिक, इस कंपनी ने हरियाणा के शिकोहपुर में करीब 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी और बाद में साल 2012 में इसी जमीन को रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डीएलएफ (DLF) को करीब 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाए गए, जिसमें जमीन का तेजी से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) करना और विकास संबंधी स्वीकृतियां शामिल थीं, जिससे इस संपत्ति की कीमत में भारी इजाफा हुआ।
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