
सागर/दमोह: मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। कूनो नेशनल पार्क के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही क्षेत्र) को चीतों का नया बसेरा बनाने की योजना पर काम चल रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जल्द ही इस क्षेत्र के जंगलों में चीतों की दहाड़ सुनाई दे सकती है।
ब्रांणवाणी को जानकारी के अनुसार कूनो में पला-बढ़ा 7 वर्षीय नामीबियाई चीता ‘गौरव’ इस नए प्रोजेक्ट का प्रमुख चेहरा बन सकता है। इसके साथ ही बोत्सवाना से कूनो लाए गए दो मादा चीते और एक अन्य नर चीते को भी नौरादेही में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इन चीतों के ट्रांसफर पर अंतिम निर्णय भारत सरकार की चीता मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा लिया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नौरादेही के मुहली रेंज में चीतों के लिए अत्याधुनिक और सुरक्षित बाड़ों (बोमा) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इन बाड़ों का कुल क्षेत्रफल लगभग 439 एकड़ तय किया गया है, जहां चीतों को सुरक्षित वातावरण में रखा जाएगा और बाद में उन्हें धीरे-धीरे जंगल में छोड़ा जाएगा।
सुरक्षा के लिहाज से इन बाड़ों को काफी हाईटेक बनाया जा रहा है। चीतों की सुरक्षा के लिए 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वारंटीन बोमा तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा बाड़ों के ऊपर 6 लेयर की इलेक्ट्रिक पल्स वायरिंग लगाई जा रही है, ताकि किसी भी तरह के बाहरी खतरे को रोका जा सके। रजनीश सिंह के अनुसार निर्माण कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जुलाई के अंत तक सभी तैयारियां पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद अगस्त के अंत तक चीतों की शिफ्टिंग शुरू हो सकती है।
इस पूरे प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कूनो नेशनल पार्क में चल रही इस ट्रेनिंग में अधिकारियों और कर्मचारियों को चीतों के व्यवहार, उनकी देखभाल, बाड़ों के रखरखाव और सुरक्षा प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। खास तौर पर चीता ‘गौरव’ के व्यवहार का अध्ययन भी कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में शिफ्टिंग के दौरान किसी तरह की समस्या न आए।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि चीतों की शिफ्टिंग को लेकर अभी अंतिम सूची तय नहीं हुई है। यह निर्णय शिफ्टिंग से ठीक पहले मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा लिया जाएगा। हालांकि शुरुआती तैयारियों और चर्चा के आधार पर ‘गौरव’ के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
इस परियोजना से न सिर्फ मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नई पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार नौरादेही में चीता प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद कूनो की तरह यहां भी सफारी और इको-टूरिज्म विकसित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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