
सागर: जिले में आगामी सिंहस्थ-2028 जैसे विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश पुलिस ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी दिशा में सागर जिले के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी JNPA में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पुलिस बल को आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन की नई तकनीकों और व्यवहारिक कौशल से लैस किया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, आधुनिक संचार प्रणाली, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में दक्ष बनाना है। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण की समीक्षा और पुलिसकर्मियों का उत्साहवर्धन करने के लिए सागर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) मिथिलेश शुक्ला, सागर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) शशीन्द्र चौहान तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) लोकेश कुमार सिन्हा विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी पहुंचे। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिसकर्मियों से सीधे संवाद किया और उन्हें सिंहस्थ जैसे महापर्व की महत्ता एवं उससे जुड़ी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया।
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अधिकारियों ने कहा कि सिंहस्थ विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ को नियंत्रित करना और सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी को उच्च अनुशासन, समर्पण और तकनीकी दक्षता के साथ कार्य करना होगा।
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में पुलिसकर्मियों को न केवल पारंपरिक पुलिसिंग के तरीके सिखाए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसमें मॉक ड्रिल, केस स्टडी और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यास शामिल हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का लाभ केवल सिंहस्थ-2028 तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले समय में अन्य बड़े आयोजनों, वीआईपी ड्यूटी और संवेदनशील कानून-व्यवस्था की स्थितियों में भी अत्यंत उपयोगी साबित होगा। सागर पुलिस द्वारा क्षमता संवर्धन की यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी, जिससे आने वाले महापर्व को पूरी तरह सुरक्षित और ऐतिहासिक रूप से सफल बनाया जा सके।
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