ओडिशा में बैंक मैनेजर ने कहा “खाताधारक को लाओ” मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई,लोग देख हुए हैरान

ओडिशा/आदित्य शंकर तिवारी: ओडिशा के केओंझार जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान हो जायेंगे। सरकारी सिस्टम की सख्ती और कागजी नियमों के आगे एक गरीब आदिवासी को कुछ ऐसा करना पड़ा। जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा नहीं होगा। इस आदिवासी को अपनी मृत बहन का कंकाल ही सबूत बनाकर बैंक तक लाना पड़ा। ये देखकर बैंक पहुंचे सभी कर्मचारी के होश उड़ गए। बैंक की केवल 19,300 रूपए की राशि के लिए भाई को ऐसा करना पड़ा।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी केओंझार जिले की बताई जा रही है। केओंझार जिले के पटना ब्लॉक के मल्लीपासि इलाके में स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक की बताई जा रही है। खबरों के अनुसार, डियानाली गांव के जीतू मुंडा की बहन कालरा मुंडा का उक्त बैंक में खाता था।

अप्रैल की चिलचिलाती धूप में यह शख्स ने अपनी बहन के कंकाल को कंधे पर लेकर पैदल-पैदल बैंक जा पहुंचा। सिर्फ़ यह साबि त करने के लिए कि उसकी बहन की मौत हो चुकी है। यह शख़्स अपनी बहन के खाते से 19,300 रुपये निकालने के लिए एक महीने से बार बार बैंक का चक्कर लगा रहा था। लेकिन ओडिशा ग्रामीण बैंक के मैनेजर ने उसको बार बार यही कह कर लौटा दिया कि खाताधारक को व्यक्तिगत रूप से लेकर आओ।

जीतू मुंडा के द्वारा बार-बार यह बताने के बावजूद कि उसकी बहन का निधन हो चुका है, बैंक मैनेजर ने उसकी एक बात नहीं मानी। वो थका हारा श्मशान घाट गया, उसने अपनी बहन के अवशेषों को खोदकर निकाला, कंकाल को कपड़े में लपेटा और ओडिशा ग्रामीण बैंक 3 किलोमीटर पैदल चलकर जा पहुंचा।

कालरा मुंडा के बैंक खाते में 19,300 जमा थे। कालरा की दो महीने पहले मौत हो चुकी थी। जीतू ही उसका इकलौते जीवित रिश्तेदार था। जीतू बहन के खाते से रुपए निकलवाने बैंक पहुंचा तो बैंक मैनेजर ने खाताधारक को लेकर आने या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस होने का प्रमाण मांगा। इसके बाद युवक ने ये कदम उठाया।

सूचना मिलते ही पटना पुलिस मौके पर पहुंची और जीतू मुंडा को शांत करने में सफल रही। अधिकारियों ने मामले को सुलझाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने स्थिति से निपटने के बैंक के तरीके की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह इस बात को उजागर करता है कि गरीब लोगों को अपने ही पैसे तक पहुंचने में भी कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

पटना पुलिस स्टेशन के आईआईसी किरण प्रसाद साहू ने कहा, “जीतू एक अनपढ़ आदिवासी है। उसे यह नहीं पता कि कानूनी वारिस या नामित व्यक्ति कौन होता है।” उन्होंने आगे कहा, “बैंक अधिकारी उन्हें मृत व्यक्ति के खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया समझाने में विफल रहे हैं।”

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    Rashel Kachwah Rajput

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